व्हाइट हाउस: ट्रंप तुर्की में पुतिन और जेलेंस्की से शांति वार्ता के लिए मिलने को "तैयार"
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने तुर्की समकक्ष रजब तैय्यब एर्दोआन के उस निमंत्रण के लिए तैयार हैं, जिसमें उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ इस्तांबुल में शांति वार्ता आयोजित करने की पेशकश की है..
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने तुर्की समकक्ष रजब तैय्यब एर्दोआन के उस निमंत्रण के लिए तैयार हैं, जिसमें उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ इस्तांबुल में शांति वार्ता आयोजित करने की पेशकश की है। यह जानकारी सोमवार को व्हाइट हाउस ने दी।
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि अगर ऐसा मौका आता है तो वे इसके लिए खुले हैं, लेकिन वह चाहते हैं कि दोनों नेता और दोनों पक्ष एक साथ बातचीत की मेज पर बैठें।"
इससे पहले दिन में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने कहा कि वह अमेरिका, रूस और यूक्रेन के नेताओं के बीच एक बैठक की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं, ताकि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास किए जा सकें, क्योंकि अब तक की कई वार्ताएं बेनतीजा रही हैं।
एर्दोआन ने कहा, "मेरी सबसे बड़ी इच्छा है कि हम व्लादिमीर पुतिन और वोलोदिमिर जेलेंस्की को इस्तांबुल या अंकारा में एक साथ बैठाएं — और यदि वे स्वीकार करें तो ट्रंप को भी उस वार्ता का हिस्सा बनाएं। हम इस दिशा में जरूरी कदम उठाएंगे।"
यह टिप्पणी उस समय आई जब सोमवार को इस्तांबुल में यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडल दूसरी दौर की वार्ता के लिए जुटे। इस बैठक में बड़े पैमाने पर बंदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी, लेकिन तत्काल युद्धविराम को लेकर कोई समझौता नहीं हो सका।
हाल ही में ट्रंप ने शांति वार्ताओं की धीमी गति को लेकर नाराज़गी जताई है। उन्होंने रूस की बिना शर्त युद्धविराम से इनकार और दोनों पक्षों द्वारा जारी भीषण बमबारी अभियानों की आलोचना की है। ट्रंप ने यहां तक चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका इन वार्ताओं से खुद को अलग कर सकता है।
ट्रंप के दबाव के चलते अब मॉस्को और कीव ने सीधे तौर पर बातचीत शुरू की है, जो रूस के आक्रमण के शुरुआती हफ्तों के बाद पहली बार हुआ है। हालांकि अब तक ये बातचीत सिर्फ बंदियों की अदला-बदली और दीर्घकालिक समाधान को लेकर मांगों की अदला-बदली तक ही सीमित रही है।
मॉस्को ने जो मांगें रखी हैं, उनमें यूक्रेन को अपने कुछ क्षेत्रों को छोड़ना, नाटो में शामिल न होना, सैन्य क्षमता को सीमित करना और पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता लेना बंद करना शामिल है। जेलेंस्की ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। कीव और पश्चिमी देश रूस के आक्रमण को एक साम्राज्यवादी ज़मीनी कब्जा करार दे रहे हैं।
रूस के आक्रमण के बाद से अब तक दसियों हज़ार लोगों की जान जा चुकी है, यूक्रेन के पूर्वी और दक्षिणी हिस्से बर्बाद हो चुके हैं, और लाखों लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं, जिससे यूरोप को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े शरणार्थी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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