सुप्रीम कोर्ट ने बाटला हाउस निवासियों को भेजे गए तोड़फोड़ नोटिसों में हस्तक्षेप करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के जामिया नगर स्थित बाटला हाउस के संपत्ति मालिकों को जारी तोड़फोड़ नोटिसों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के जामिया नगर स्थित बाटला हाउस के संपत्ति मालिकों को जारी तोड़फोड़ नोटिसों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
शीर्ष अदालत 40 निवासियों की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने तोड़फोड़ आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे इस संबंध में उचित अधिकारियों से संपर्क करें।
22 मई को जारी किए गए इन नोटिसों को प्रभावित संपत्तियों पर चिपकाया गया था। नोटिस में कहा गया, "सभी को सूचित किया जाता है कि ओखला, खिजरबाबा कॉलोनी में उत्तर प्रदेश सिंचाई नियंत्रण विभाग की जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। इस जमीन पर बने मकान और दुकानें अवैध हैं और इन्हें अगले 15 दिनों के भीतर हटा लिया जाना चाहिए।"
जुलाई में होगी याचिका पर सुनवाई
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि वह ओखला गांव में कथित अवैध निर्माणों को गिराने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका पर जुलाई में सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने अदालत को बताया कि शीर्ष अदालत ने 7 मई के एक आदेश में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को कानून के अनुसार ओखला गांव में अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था।
आप विधायक अमानतुल्लाह खान का बयान
ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा कि जिस बस्ती को लेकर विवाद है, वह पिछले 40 वर्षों से अस्तित्व में है और अब अनधिकृत रूप से नियमित (unauthorised regularised) हो चुकी है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बाहर पत्रकारों से कहा, "हमें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है कि एक नियमित पीठ इस मामले की जुलाई में सुनवाई करेगी, जब अदालत फिर से खुलेगी।"
उन्होंने आगे कहा, "जिन परिवारों को प्रभावित किया जाना था, उनसे पीएम-उदय योजना के तहत आवेदन करने को कहा गया है... यह बस्ती पिछले 40 वर्षों से है और अब अनधिकृत रूप से नियमित हो चुकी है... कॉलोनी पहले से ही संरक्षित है। डीडीए ने यहां गलत तरीके से ‘चुनिंदा कार्रवाई’ की है और गलत रिपोर्टिंग की है..."
यह मामला अब जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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