ट्रंप प्रशासन की बड़ी चूक: पत्रकार को ‘गलती से’ यमन हमले की योजना भेजी गई, जानिए फिर क्या हुआ

अमेरिका में एक बड़ा सुरक्षा उल्लंघन सामने आया है, जिसमें ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने गलती से यमन में हूती विद्रोहियों पर किए जाने वाले हवाई हमलों की योजना एक पत्रकार को भेज दी। द अटलांटिक पत्रिका के प्रधान संपादक जेफ्री गोल्डबर्ग ने खुलासा किया कि उन्हें गलती से एक सिग्नल ग्रुप में जोड़ दिया गया था, जिसमें अमेरिका की 15 मार्च को हूती विद्रोहियों पर किए गए हमलों की योजना पर चर्चा हो रही थी।

ट्रंप प्रशासन की बड़ी चूक: पत्रकार को ‘गलती से’ यमन हमले की योजना भेजी गई, जानिए फिर क्या हुआ
25-03-2025 - 01:32 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

वॉशिंगटन। अमेरिका में एक बड़ा सुरक्षा उल्लंघन सामने आया है, जिसमें ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने गलती से यमन में हूती विद्रोहियों पर किए जाने वाले हवाई हमलों की योजना एक पत्रकार को भेज दी। द अटलांटिक पत्रिका के प्रधान संपादक जेफ्री गोल्डबर्ग ने खुलासा किया कि उन्हें गलती से एक सिग्नल ग्रुप में जोड़ दिया गया था, जिसमें अमेरिका की 15 मार्च को हूती विद्रोहियों पर किए गए हमलों की योजना पर चर्चा हो रही थी।

कैसे हुआ खुलासा?

गोल्डबर्ग ने इस घटना का ज़िक्र "द ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन एक्सीडेंटली टेक्स्टेड मी इट्स वॉर प्लांस" नामक एक लेख में किया, जो सोमवार को प्रकाशित हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, 13 मार्च को अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर माइक वॉल्ट्ज ने उन्हें "Houthi PC small group" नामक एक सिग्नल ग्रुप में आमंत्रित किया। इस ग्रुप में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ जैसे शीर्ष अधिकारी शामिल थे।

शुरुआत में गोल्डबर्ग को संदेह हुआ कि यह कोई भ्रामक सूचना अभियान (disinformation campaign) हो सकता है। उन्हें यह विश्वास नहीं हुआ कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम एक खुले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर युद्ध योजना पर चर्चा कर सकती है।

गलती का एहसास होते ही पत्रकार ने क्या किया?

गोल्डबर्ग ने बताया कि जब उन्हें इस संदेशों की प्रामाणिकता का एहसास हुआ, तो उन्होंने चुपचाप ग्रुप छोड़ दिया। बाद में, उन्होंने अधिकारियों से संपर्क कर यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उन्हें इतनी संवेदनशील चर्चा में क्यों जोड़ा गया था

सुरक्षा चूक को लेकर बहस

यह घटना सामने आने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों और प्रोटोकॉल पर बहस छिड़ गई है। खासतौर पर गोपनीय सैन्य योजनाओं के लिए अनौपचारिक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।

15 मार्च को हूती विद्रोहियों पर अमेरिकी हमला

15 मार्च को अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। ट्रंप प्रशासन ने इस ऑपरेशन को निर्णायक हमला करार दिया।

  • नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर माइक वॉल्ट्ज ने बाद में एबीसी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि यह हमला हूती नेताओं को निर्णायक संदेश देने के लिए किया गया था
  • अमेरिका की इस कार्रवाई के पीछे मकसद हूती विद्रोहियों के प्रभाव को कम करना था।
  • हालांकि, इस ऑपरेशन की योजना का पत्रकार तक पहुंचना प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

व्हाइट हाउस ने स्वीकार की सुरक्षा चूक

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने इस सुरक्षा चूक की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सिग्नल ग्रुप और उसके संदेश वैध थे

हालांकि, ह्यूजेस ने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के बीच यह चर्चा नीतिगत समन्वय का हिस्सा थी और ऑपरेशन की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि इससे किसी सैन्य अभियान या सैनिकों की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हुआ

महत्वपूर्ण सवाल और जवाब

 यमन में अमेरिकी हमला कब हुआ?
15 मार्च को अमेरिका ने ईरान समर्थित हूती नेताओं के खिलाफ हवाई हमले किए।

 पत्रकार जेफ्री गोल्डबर्ग को युद्ध योजना की जानकारी कैसे मिली?
उन्हें गलती से ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के एक सिग्नल ग्रुप में जोड़ दिया गया, जहां इस हमले पर चर्चा हो रही थी।

 क्या इस घटना से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा था?
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ऑपरेशन की सफलता से सैनिकों को कोई खतरा नहीं था, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।