तुर्की ने पेश किया दुनिया का पहला ‘सी-स्किमिंग’ कॉम्बैट ड्रोन, जो अमेरिका, रूस और चीन के पास भी नहीं
1960 के दशक में सोवियत संघ ने पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को तब चौंका दिया था जब उसने कैस्पियन सी मॉन्स्टर नामक विशाल पंखों वाला जहाज पेश किया था, जो पानी की सतह से ज़रा ऊपर उड़ता था और रडार से छिपा रहता था..
नयी दिल्ली। 1960 के दशक में सोवियत संघ ने पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को तब चौंका दिया था जब उसने कैस्पियन सी मॉन्स्टर नामक विशाल पंखों वाला जहाज पेश किया था, जो पानी की सतह से ज़रा ऊपर उड़ता था और रडार से छिपा रहता था। अब तुर्की ने उसी अवधारणा को आधुनिक रूप देकर TALAY नाम का दुनिया का पहला समुद्री सतह के बेहद करीब उड़ने वाला बहुउद्देश्यीय मानवरहित हवाई वाहन (UAV) विकसित किया है।
अंकारा स्थित डिफेंस इनोवेटर सॉलिड एयरो की वेबसाइट के अनुसार, यह अत्याधुनिक यान उत्पादन के लिए तैयार है और अपने तरह का पहला है। इसमें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन की स्टील्थ क्षमता और विंग-इन-ग्राउंड (WIG) इफेक्ट वाहन की एयरोडायनामिक दक्षता का मेल है, जिससे समुद्री हमले और टोही अभियानों के लिए एक नई श्रेणी का प्लेटफ़ॉर्म तैयार हुआ है।
पारंपरिक UAVs जो सतह से काफी ऊपर उड़ते हैं, उनके विपरीत TALAY समुद्र की सतह से केवल 30 सेंटीमीटर से 100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ सकता है, जो सामान्य रडार की पकड़ से बाहर रहता है।
इस कम ऊंचाई वाली उड़ान क्षमता के कारण यह शत्रु क्षेत्र में बिना पकड़े घुस सकता है—जिससे यह बंदरगाह पर हमले, टोही मिशन और त्वरित समुद्री अभियान के लिए आदर्श है।
निर्माता के अनुसार, इसके फोल्डेबल विंग्स इसे तेजी से तैनात करने में मदद करते हैं, और इसका कम रडार क्रॉस-सेक्शन व हल्का स्टील्थ-फोकस्ड डिज़ाइन इसे तब तक लगभग अदृश्य बनाए रखता है जब तक कि दुश्मन प्रतिक्रिया न कर पाए।
शक्ति, पेलोड और सटीकता
9.84 फुट विंगस्पैन और 9.19 फुट लंबाई जैसे कॉम्पैक्ट आकार के बावजूद, TALAY 30 किलो (66 पाउंड) तक का पेलोड ले जा सकता है—चाहे वह उन्नत सेंसर हों या छोटे पारंपरिक एंटी-शिप मिसाइलों के बराबर गोला-बारूद।
इलेक्ट्रिक इंजन और Li-Po बैटरी से संचालित यह ड्रोन 200 किमी/घंटा (124 मील/घंटा) की रफ्तार पकड़ सकता है और 200 किमी (124 मील) की रेंज के साथ तीन घंटे तक उड़ सकता है।
इसका उपयोग इन अभियानों में किया जा सकता है..
- सामान्य हमला
- टॉप अटैक
- बंदरगाह हमला
- गश्त और टोही मिशन
- कार्गो परिवहन
एडवांस्ड AI-युक्त फ़्लाइट कंट्रोल सिस्टम इसे स्वायत्त और ऑपरेटर-नियंत्रित दोनों मोड में बेहद सटीक और अनुकूल बनाता है, यहां तक कि समुद्री स्थिति तीन (Sea State 3) में भी।
‘कैस्पियन सी मॉन्स्टर’ से जुड़ाव
हालांकि ड्रोन के रूप में TALAY एक क्रांतिकारी अवधारणा है, लेकिन विंग-इन-ग्राउंड इफेक्ट का उपयोग करने वाला यह पहला यान नहीं है।
शीत युद्ध काल में सोवियत संघ का विशाल KM एक्रानोप्लान, जिसे ‘कैस्पियन सी मॉन्स्टर’ कहा जाता था, सैन्य सुर्खियों में छाया रहता था। वह भारी-भरकम मानवयुक्त यान था, जिसका वजन सैकड़ों टन था और जिसे सैनिक व मिसाइल परिवहन के लिए बनाया गया था।
इसके विपरीत, TALAY ने इस अवधारणा को छोटे, फुर्तीले और स्टील्थ-केंद्रित UAV में बदला है, जो बिना मानव चालक दल को खतरे में डाले सटीक हमले और टोही की सुविधा देता है—यानी लागत और सुरक्षा, दोनों में बड़ा सुधार।
छोटा आकार, बड़ा खतरा
भले ही इसका पेलोड बड़े नौसैनिक मिसाइलों के मुकाबले कम है, लेकिन स्वॉर्म टैक्टिक्स (झुंड में हमले) की क्षमता इसे गंभीर समुद्री खतरा बना देती है।
कई ड्रोन एक साथ हमला कर किसी युद्धपोत की रक्षा व्यवस्था को मात दे सकते हैं और कॉर्वेट, इनशोर पेट्रोल क्राफ्ट या बड़े जहाजों को भी निशाना बना सकते हैं।
उत्पादन के लिए तैयार मॉडल इंटरनेशनल डिफेंस इंडस्ट्री फेयर (IDEF 2025), इस्तांबुल में पहले ही प्रदर्शित किए जा चुके हैं।
ग्रीक रिपोर्टर के अनुसार, TALAY का सीरियल उत्पादन अक्टूबर 2026 में शुरू होगा और पहले उत्पादन मॉडल 2027 की शुरुआत में तुर्की नौसेना को सौंपे जाएंगे।
अन्य देश
- अमेरिका: प्रशांत क्षेत्र में तेज़ पुनः आपूर्ति के लिए ‘लिबर्टी लिफ्टर’ विकसित कर रहा है।
- चीन: निम्न ऊंचाई वाले समुद्री ड्रोन के कॉन्सेप्ट पेश कर चुका है, लेकिन वे अभी प्रारंभिक चरण में हैं।
- रूस: आधुनिक गश्ती व मिसाइल-लॉन्च अनुकूलन पर संकेत दिए हैं, पर कोई उत्पादन-तैयार मॉडल नहीं है।
- ईरान: छोटे तटीय रक्षा WIG क्राफ्ट का संकेत दिया है।
- यूरोप (जर्मनी, ब्रिटेन): WIG ट्रांसपोर्ट पर शोध, मुख्यतः नागरिक या खोज-बचाव कार्य के लिए।
- ऑस्ट्रेलिया: छोटे प्रोटोटाइप का द्वीप-आधारित लॉजिस्टिक्स में परीक्षण।
वर्तमान भू-राजनीतिक दौर में जहां विवादित तटीय क्षेत्र भविष्य के युद्ध को परिभाषित कर रहे हैं, ऐसे प्लेटफ़ॉर्म का महत्व फिर से बढ़ रहा है।
लेकिन अमेरिका, रूस, चीन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और ईरान की परियोजनाओं से अलग, TALAY की सबसे बड़ी ताकत यह है कि
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