यूजीसी नियमों पर विवाद: यूपी में प्रदर्शन तेज, बीजेपी पदाधिकारी ने दिया इस्तीफा, एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री को खून से लिखा पत्र, केद्र सरकार की ओर से आश्वासन कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा

उत्तर प्रदेश में नए यूजीसी नियमों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन बुधवार को और तेज हो गए। देवरिया में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखने को मिले, कौशांबी में एक प्रदर्शनकारी ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा, जबकि रायबरेली में बीजेपी के एक पदाधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा..

यूजीसी नियमों पर विवाद: यूपी में प्रदर्शन तेज, बीजेपी पदाधिकारी ने दिया इस्तीफा, एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री को खून से लिखा पत्र, केद्र सरकार की ओर से आश्वासन कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा
29-01-2026 - 09:28 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

देवरिया/रायबरेली। उत्तर प्रदेश में नये यूजीसी नियमों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन बुधवार को और तेज हो गए। देवरिया में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखने को मिले, कौशांबी में एक प्रदर्शनकारी ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा, जबकि रायबरेली में बीजेपी के एक पदाधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

यह विवाद 13 जनवरी को उस समय शुरू हुआ, जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने नये नियमों को अधिसूचित किया। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय के सदस्यों को शामिल करते हुए ‘इक्विटी कमेटी’ गठित करना अनिवार्य किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का समाधान करना और समावेशन को बढ़ावा देना है।

इस फैसले के बाद कई वर्गों से विरोध सामने आया है। विरोध करने वालों का कहना है कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 का दुरुपयोग कर जाति-आधारित असंतोष फैलाया जा सकता है, जिससे शैक्षणिक माहौल खराब होने की आशंका है।

देवरिया में बड़ा प्रदर्शन

देवरिया में हजारों लोगों ने जिला न्यायालय परिसर में धरना दिया और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी सुभाष चौक से कलेक्ट्रेट तक मार्च करते हुए पहुंचे और जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर नारे लगाए। इसके बाद उन्होंने जिला न्यायालय के बाहर सड़क जाम कर दी, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा।

वकीलों के एक वर्ग ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी काली पट्टी बांधे नजर आए। शुरुआत में जिला प्रशासन सड़क से जाम हटाने में असफल रहा क्योंकि प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के मौके पर आने की मांग कर रहे थे।

बाद में जिलाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचीं, उन्होंने ज्ञापन स्वीकार किया और प्रदर्शनकारियों को समझाकर सड़क जाम हटवाया।

देवरिया कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रीतम मिश्रा ने दावा किया कि नये नियम “भेदभावपूर्ण” हैं और इससे छात्रों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कुछ वकीलों का कहना था कि ये नियम सामाजिक वैमनस्य पैदा कर सकते हैं और समाज में विभाजन को और गहरा कर सकते हैं।

रायबरेली में बीजेपी पदाधिकारी का इस्तीफा

रायबरेली में बीजेपी किसान मोर्चा के सलोन मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने नए यूजीसी नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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जनवरी को प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व को संबोधित अपने इस्तीफे में त्रिपाठी ने कहा कि वे इन नियमों से असंतुष्ट हैं। उन्होंने इन्हें “हानिकारक” और “विभाजनकारी” बताया।

कौशांबी में खून से लिखा पत्र

कौशांबी में ‘सवर्ण आर्मी’ के एक स्थानीय पदाधिकारी के विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सवर्ण आर्मी’ के जिला प्रमुख अभिषेक पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखा और नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की।

पांडेय ने दावा किया कि ये नियम ‘सवर्ण’ युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाएंगे और उन्होंने अन्य जिलों के लोगों से भी इसी तरह के विरोध दर्ज कराने की अपील की।

पुराने नियमों की जगह नए नियम

नये नियम यूजीसी के 2012 के इक्विटी नियमों की जगह लाए गए हैं, जो मुख्य रूप से परामर्शात्मक (एडवाइजरी) प्रकृति के थे।

केंद्र सरकार की सफाई

विरोध और आशंकाओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को भरोसा दिलाया कि नए नियमों से किसी को परेशान या भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नियमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान मौजूद हैं।

किसी के साथ अन्याय नहीं होगाः धर्मेंद्र प्रधान

नये अधिसूचित यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों द्वारा जताई जा रही चिंताओं और देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इन नियमों को पूरी तरह संवैधानिक ढांचे के भीतर और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लागू किया जा रहा है।

इक्विटी प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधान ने कहा, मैं बहुत विनम्रता से सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लागू की जा रही है। मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा।”

यूजीसी ने हाल ही में ये इक्विटी नियम उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) में आरक्षित वर्गों के छात्रों के खिलाफ होने वाले जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से लागू किए हैं। नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर’ (EOC) की स्थापना और कैंपस स्तर पर भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच व समानता को बढ़ावा देने के लिए समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है।

हालांकि, इन नियमों के खिलाफ यूजीसी मुख्यालय के बाहर ‘सवर्ण सेना’ के नेतृत्व में प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों की शिकायतों के निवारण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे असमानता बढ़ सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतें 2016-17 में लगभग 173 से बढ़कर 2023-24 शैक्षणिक वर्ष में 350 से अधिक हो गई हैं।

ये नियम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद तैयार किए गए हैं, जो 2012 के यूजीसी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों के क्रियान्वयन से जुड़ी याचिका पर आधारित था। यह याचिका रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं द्वारा दायर की गई थी। दोनों ने कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद अलग-अलग घटनाओं में आत्महत्या कर ली थी।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने इन नियमों का समर्थन करते हुए इन्हें संस्थागत विफलताओं के वर्षों का परिणाम बताया। हालांकि, संगठन ने भेदभाव की अस्पष्ट परिभाषा और इक्विटी समितियों में एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता भी जताई।

विरोध को देखते हुए सरकार ने कहा है कि वह नियमों में ऐसा प्रावधान जोड़ने पर विचार कर रही है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों की शिकायतों का भी उचित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।