वक्फ एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: देशद्रोह, अनुच्छेद 370 जैसे मामलों की तरह केंद्र ने टाला संभावित अदालती झटका
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की दो विवादास्पद धाराओं — ‘प्रयोग से वक्फ (Waqf by use)’ और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने — पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही केंद्र सरकार ने इन प्रावधानों को रोकने का आश्वासन दिया..
नयी दिल्ली। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की दो विवादास्पद धाराओं — ‘प्रयोग से वक्फ (Waqf by use)’ और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने — पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही केंद्र सरकार ने इन प्रावधानों को रोकने का आश्वासन दिया। यह एक बार फिर उस रणनीति का हिस्सा दिखता है, जिसके जरिए केंद्र सरकार संभावित प्रतिकूल अदालत के फैसले से पहले ही कदम उठाकर उसे टाल देती है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
- 16 अप्रैल को, CJI डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से संकेत दिया था कि तीन प्रमुख प्रावधानों पर स्थगन लगाया जा सकता है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि दो अन्य वकीलों को भी सुना जाए।
- 18 अप्रैल को, मेहता ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया और लिखा हुआ पक्ष दाखिल करने का समय मांगा।
लेकिन जब बेंच ने 'waqf by use' पर आपत्ति जताई, तो उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को रोक दिया जाएगा और राज्यों को गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति नहीं करने दी जाएगी।
यह पहले भी हुआ है – ऐसे मामलों में केंद्र ने उठाए 'पूर्व-उपाय'
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मामला |
स्थिति |
सरकार का कदम |
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देशद्रोह कानून (2022) |
SC ने कहा – Prima facie कानून असंवैधानिक |
केंद्र ने कहा – “हम पुनर्विचार करेंगे” |
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अनुच्छेद 370 (2023) |
SC में सवाल – क्या संसद राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना सकती है? |
केंद्र ने कहा – “जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा” |
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साफूरा ज़रगर मामला (2020) |
अदालत जमानत देने की तरफ |
केंद्र ने कहा – “हमें जमानत पर कोई आपत्ति नहीं, मानवीय आधार पर” |
विश्लेषण: क्यों अपनाई जाती है ये रणनीति?
- जब सुप्रीम कोर्ट कोई ऐसी मौखिक टिप्पणी करता है, जिससे किसी कानून या सरकारी नीति पर रोक की आशंका बनती है —
केंद्र सरकार सुनवाई से पहले ही लचीला रुख दिखाकर उस आदेश से बचने की कोशिश करती है। - इससे सरकार को:
- कानून की वैधता पर फैसला रुकवाने में मदद मिलती है,
- भविष्य में कानूनी बाध्यता से राहत मिलती है,
- और राजनीतिक नुकसान से भी बचा जा सकता है।
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