'संविधान की रक्षा करना राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का कर्तव्य': वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील ने उपराष्ट्रपति धनखड़ के न्यायपालिका पर बयान का समर्थन किया
वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील महेश जेठमलानी ने कहा है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का कर्तव्य है कि वे संविधान की रक्षा करें। उन्होंने हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा न्यायपालिका पर दिए गए तीखे बयान का समर्थन किया है..
नयी दिल्ली। वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील महेश जेठमलानी ने कहा है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का कर्तव्य है कि वे संविधान की रक्षा करें। उन्होंने हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा न्यायपालिका पर दिए गए तीखे बयान का समर्थन किया है। यह बयान उन्होंने राज्यसभा इंटर्न्स को संबोधित करते हुए दिया था। यह बयान उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक आदेश में राष्ट्रपति से राज्यपाल द्वारा सुरक्षित रखे गए विधेयकों पर समयबद्ध तरीके से मंजूरी देने की प्रक्रिया तय करने की बात कही।
महेश जेठमलानी ने कहा कि धनखड़ जी ने केवल संविधान में एक त्रुटि की ओर इशारा किया है, जो अब न्यायपालिका की अति-सक्रियता (judicial overreach) को लेकर जनता की बढ़ती धारणा के संदर्भ में सामने आ रही है। उन्होंने कहा, "धनखड़ जी ने सिर्फ संविधान की एक खामी को उजागर किया है। यह बात सोशल मीडिया पर जनता की राय में भी दिखाई देती है... पारदर्शिता की कमी एक अहम मुद्दा है। जस्टिस वर्मा के 'कैश-एट-होम' मामले में तबादला जनता को ठीक नहीं लगा। राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति दोनों का दायित्व है कि वे संविधान की रक्षा करें।"
धनखड़ का न्यायपालिका पर सीधा सवाल
18 अप्रैल (गुरुवार) को उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की आलोचना की जिसमें राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए समय-सीमा तय करने की बात की गई थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट लोकतांत्रिक संस्थाओं पर "न्यूक्लियर मिसाइल" नहीं चला सकता। उन्होंने कहा, "तो अब हमारे पास ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे, कार्यपालिका का काम करेंगे, सुपर संसद की तरह काम करेंगे, और जिन पर कोई जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू ही नहीं होता।"
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