आखिर क्यों खारिज हुआ कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन? जानिए पूरा मामला
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मंगलवार (9 जून) को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) ने उनका पर्चा निरस्त कर दिया, जिसके विरोध में कांग्रेस ने तीखा प्रदर्शन..
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मंगलवार (9 जून) को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) ने उनका पर्चा निरस्त कर दिया, जिसके विरोध में कांग्रेस ने तीखा प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना भी दिया।
24 सीटों वाले राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की तीन सीटें भी शामिल हैं। कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था और पार्टी अपने विधायकों में किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए पूरी तैयारी कर रही थी। लेकिन जांच के दौरान उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन?
मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं और पूर्व में यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वह 2009 से 2014 तक मध्य प्रदेश के मंदसौर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वह कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव रही हैं और उन्हें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिना जाता है।
हालांकि उनकी उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस के भीतर भी असंतोष देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर सवाल उठाए थे और क्रॉस वोटिंग की आशंका जताने के बाद सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
नामांकन पर क्यों उठी आपत्ति?
भाजपा के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप था कि नटराजन ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथपत्र (एफिडेविट) में अपने खिलाफ लंबित एक न्यायिक मामले की पूरी जानकारी नहीं दी।
यह आपत्ति हैदराबाद की एक अदालत में लंबित निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) से जुड़ी थी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2022 में तेलंगाना में दर्ज एक आपराधिक मामले से जुड़ा है। यह मामला एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है, जिसमें उसने एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के पूर्व सहयोगी पर लंबे समय तक शोषण, धमकी और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। यह मामला फिलहाल आरोप तय होने की प्रक्रिया में है।
मीनाक्षी नटराजन इस मूल आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं। हालांकि अगस्त 2025 में उसी महिला ने हैदराबाद की अदालत में एक निजी शिकायत दायर की, जिसमें कई कांग्रेस पदाधिकारियों, विधायकों और नेताओं को भी आरोपी बनाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन नेताओं ने गंभीर आरोपों का सामना कर रहे प्रभावशाली लोगों को राजनीतिक संरक्षण दिया।
उस समय मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी थीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने नटराजन से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर आरोपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत के अनुसार, नटराजन ने कहा था कि संबंधित आरोपी को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है, लेकिन जब उनसे निलंबन पत्र मांगा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसी आधार पर निजी शिकायत में उन्हें भी आरोपी बनाया गया।
हालांकि इस शिकायत में नटराजन पर मूल आपराधिक घटनाओं में शामिल होने का कोई आरोप नहीं लगाया गया है। शिकायत का मुख्य आरोप संगठनात्मक निष्क्रियता और गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण देने से संबंधित है।
मीनाक्षी नटराजन का पक्ष
मामला अदालत में आने पर मीनाक्षी नटराजन ने 24 अक्टूबर 2025 को विस्तृत जवाब दाखिल किया। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि जिस विवाद में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी, उसमें उन्हें अनुचित तरीके से घसीटा गया है।
कांग्रेस ने भी दावा किया कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं है। पार्टी के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि इस मामले में केवल कानूनी नोटिस मिला है, कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने क्यों खारिज किया नामांकन?
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने फॉर्म-26 में अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया और अदालत में लंबित मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया।
आदेश में कहा गया, "उम्मीदवार ने मतदाताओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई है। यह स्पष्ट रूप से स्थापित होता है कि पूर्ण जानकारी देने के बजाय अधूरी जानकारी प्रस्तुत की गई।"
इसी आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द होने के क्या कारण हो सकते हैं?
चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार, उम्मीदवार को फॉर्म-26 में निम्नलिखित जानकारियां अनिवार्य रूप से देनी होती हैं—
- यदि कोई आपराधिक मामला लंबित है या सजा हुई है तो उसकी पूरी जानकारी।
- स्वयं, जीवनसाथी और आश्रितों के आयकर रिटर्न और पैन विवरण।
- चल-अचल संपत्ति और देनदारियों का विवरण।
- सरकारी एवं वित्तीय संस्थानों के बकाया की जानकारी।
- उम्मीदवार और जीवनसाथी का व्यवसाय।
- उम्मीदवार की उच्चतम शैक्षणिक योग्यता।
यदि इनमें से किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया जाता है या अधूरा विवरण दिया जाता है, तो नामांकन रद्द किया जा सकता है।
कांग्रेस ने लगाया लोकतंत्र की हत्या का आरोप
नामांकन खारिज होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर लोकतंत्र और संविधान का गला घोंटने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "जो पहले वोट चोरी तक सीमित था, अब सीट चोरी तक पहुंच गया है। जब उन्हें लगा कि यह एकजुट सदन है और विभाजित नहीं, तब एक कानूनी नोटिस के बहाने हमारे नामांकन को चुनौती दी गई। हमारे वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया और फैसला सुना दिया गया। यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। हम इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे।"
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मुलाकात भी करने वाला है।
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