सावधान.. 'साहब' की डीपी लगाकर ठग रहे हैं साइबर अपराधी; राजस्थान पुलिस ने जारी की 'इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे "इम्पर्सोनेशन फ्रॉड (पहचान चोरी) को लेकर एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वी के सिंह के निर्देशानुसार विभाग ने आमजन और विशेषकर सरकारी व निजी विभागों के कर्मचारियों को सतर्क रहने को..

सावधान.. 'साहब' की डीपी लगाकर ठग रहे हैं साइबर अपराधी; राजस्थान पुलिस ने जारी की 'इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' एडवाइजरी
29-04-2026 - 01:06 PM

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे "इम्पर्सोनेशन फ्रॉड (पहचान चोरी) को लेकर एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम  वी के सिंह के निर्देशानुसार विभाग ने आमजन और विशेषकर सरकारी व निजी विभागों के कर्मचारियों को सतर्क रहने को कहा है। साइबर अपराधी अब अधिकारियों के नाम और फोटो का सहारा लेकर डिजिटल ठगी के नए जाल बुन रहे हैं।

कैसे जाल बिछाते हैं अपराधी?

उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि अपराधी किसी भी वारदात से पहले पूरी रेकी करते हैं। वे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से अधिकारियों के नाम और पद निकालते हैं। इसके बाद LinkedIn और Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से यह पता लगाते हैं कि कौन किसका जूनियर है और वर्तमान में विभाग में कौन सा प्रोजेक्ट चल रहा है। कई बार ये अपराधी विभागीय WhatsApp ग्रुप्स में सेंध लगाकर सदस्यों की सूची भी चोरी कर लेते हैं।

ठगी के 'हाई-टेक' तरीके: पहचानिए ये खतरे

साइबर ठग अब केवल मैसेज तक सीमित नहीं हैं, वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं..

  फेक प्रोफाइल और इमरजेंसी का बहाना: किसी बड़े अधिकारी (जैसे डायरेक्टर, कमिश्नर या एमडी) की फोटो लगाकर नया व्हाट्सएप अकाउंट बनाया जाता है। अपराधी मैसेज करता है "मैं मीटिंग में हूँ, कॉल नहीं ले सकता, तुरंत कुछ गिफ्ट वाउचर्स या पैसे इस नंबर पर भेज दो।"

  डीपफेक वॉइस (एआई का खेल):आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए अपराधी आपके बॉस की आवाज की हूबहू नकल कर कॉल करते हैं, जिससे कर्मचारी को लगता है कि सच में साहब ही बोल रहे हैं।

  Spoofed Emails: ईमेल एड्रेस बिल्कुल असली जैसा दिखता है, जिसमें केवल एक छोटे से अक्षर या डोमेन (जैसे .com की जगह .in-com) का अंतर होता है।

  मेडिकल इमरजेंसी: रिश्तेदार के अस्पताल में होने का झांसा देकर तुरंत पैसों की मांग करना।

बचाव के लिए 'गोल्डन रूल्स'

 1. यदि किसी नए नंबर से अधिकारी के नाम पर मैसेज आए, तो तुरंत उनके पुराने या आधिकारिक नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।

 2. इंटरनेट से किसी की भी डीपी (प्रोफाइल पिक्चर) डाउनलोड करना आसान है। केवल फोटो देखकर भरोसा न करें।

 3. ठग हमेशा 'इमरजेंसी' दिखाकर आपको सोचने का समय नहीं देते। किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले शांत रहें और अपने वरिष्ठों से चर्चा करें।

 4. अपना ओटीपी (OTP), बैंक विवरण या व्यक्तिगत जानकारी कभी भी व्हाट्सएप पर साझा न करें।

यहाँ करें शिकायत

यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है या कोई ठगी की कोशिश करता है, तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन 1930, साइबर हेल्पडेस्क 9256001930/9257510100, ऑनलाइन पोर्टल www.cybercrime.gov.in और अपने पास के साइबर पुलिस स्टेशन में भी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।