आखिर.., क्या होती है कार्बन डेटिंग..?
ज्ञानवापी मामले में एक वैज्ञानिक विधि, जिसका नाम कार्बन डेटिंग है,बार-बार सामने आ रहा है। कार्बन डेटिंग क्या होती है और किस चीज की जांच की जाती है कार्बन डेटिंग से? क्या किसी भी चीज की उम्र का भी पता लगाया जाता है, यदि हां तो किन चीजों का और कैसे...? आइए विस्तार से समझते हैं..
क्या होती है कार्बन डेटिंग
किसी भी वस्तु का उम्र का पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग का इस्तेमाल किया जाता है। 'रेडियो कार्बन डेटिंग तकनीक' का आविष्कार 1949 में शिकागो यूनिवर्सिटी के विलियर्ड लिबी और उनके साथियों ने किया था। 1960 में उन्हें इस काम के लिए रसायन का नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था। इस तकनीक के जरिए वैज्ञानिक लकड़ी, चारकोल ,बीज, बीजाणु और पराग हड्डी, चमड़े, बाल, फर, सींग और रक्त अवशेष, पत्थर, मिट्टी से भी उसकी बेहद करीबी वास्तविक आयु का पता लगा सकते हैं। जिस भी चीज में कार्बन की मात्रा होती है। उसकी उम्र का इस तकनीक से पता लगाया जा सकता है।
कार्बन डेटिंग का विज्ञान
वायुमंडल में कार्बन के तीन तरह के आइसोटोप पाए जाते हैं। कॉर्बन 12, कार्बन 13 और कार्बन 14 के रूप में जाने जाते हैं। कार्बन डेटिंग के माध्यम से कार्बन 12 से कार्बन 14 के बीच का अनुपात निकाला जाता है। जब किसी की मृत्यु होती है, तब वे वातावरण से कार्बन का आदान-प्रदान बंद कर देते हैं। इस अंतर के आधार पर किसी अवशेष की उम्र पता लगाई जाती है। आमतौर पर कार्बन डेटिंग की मदद से केवल 50,000 साल पुराने अवशेष का ही पता लगाया जा सकता है।
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