जुना अखाड़ा से निष्कासित हुए 'आईआईटी बाबा' जो 2025 के महाकुंभ में बने थे चर्चा का केंद्र..!
महाकुंभ मेला 2025 में मीडिया के जरिए चर्चा में आए 'आईआईटी बाबा' अचानक जुना अखाड़ा से निष्कासित कर दिए गए हैं। उनके इस अप्रत्याशित निष्कासन का कारण सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रसिद्धि, अनुशासनहीनता और अखाड़ा की परंपराओं के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें बताई जा रही हैं।
प्रयागराज। महाकुंभ मेला 2025 में मीडिया के जरिए चर्चा में आए 'आईआईटी बाबा' अचानक जुना अखाड़ा से निष्कासित कर दिए गए हैं। उनके इस अप्रत्याशित निष्कासन का कारण सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रसिद्धि, अनुशासनहीनता और अखाड़ा की परंपराओं के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें बताई जा रही हैं। इस घटनाक्रम ने उनके अनुयायियों और दर्शकों को हैरानी और मिश्रित भावनाओं से भर दिया है।
आईआईटी बाबा का परिचय
आईआईटी बाबा, जिनका असली नाम अभय सिंह है, हरियाणा के निवासी हैं और उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से स्नातक किया है। आधुनिक शिक्षा और प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान के संगम के प्रतीक के रूप में, उनकी यात्रा ने कई लोगों को प्रेरित किया। हालांकि, जिस प्रसिद्धि ने उन्हें एक नई पहचान दी, वही अब उनके पतन का कारण बन गई।
विवाद का कारण
जुना अखाड़ा, जो हिंदू साधुओं का एक बड़ा और प्रभावशाली समूह है, सार्वजनिक उपस्थिति और मीडिया संपर्कों के लिए सख्त नियमों का पालन करता है। सूत्रों के अनुसार, आईआईटी बाबा की सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता ने अखाड़ा के वरिष्ठ संतों के बीच नाराजगी पैदा की।
अखाड़ा की परंपरा के अनुसार, मीडिया से बातचीत का अधिकार केवल वरिष्ठ संतों को होता है। बाबा का सोशल मीडिया पर वायरल होना इस प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना गया।
इसके अलावा, उनकी व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कुछ परेशानियों की भी चर्चा है। एक वरिष्ठ संत ने टाइम्स नाउ को बताया, "उनका संतुलन बिगड़ने लगा था — उनके शब्द, स्थिरता और ध्यान में कमी दिखने लगी थी। हमें पता चला कि उन्होंने कुछ ऐसा सेवन करना शुरू कर दिया था, जो उनकी आध्यात्मिक साधना में बाधा डाल रहा था।"
अखाड़ा का निर्णय
जुना अखाड़ा की नेतृत्व टीम ने फैसला किया कि आईआईटी बाबा को सार्वजनिक जीवन से अलग रहकर केवल अपनी आध्यात्मिक साधना पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे सोशल मीडिया से दूर रहें और लोकप्रियता के बजाय ज्ञान और साधना पर ध्यान दें।
आईआईटी बाबा का उभार
महाकुंभ 2025 के दौरान, आईआईटी बाबा श्रद्धालुओं और मीडिया के बीच एक बड़ी हस्ती बनकर उभरे। उन्होंने आधुनिक और प्राचीन ज्ञान के समन्वय पर आधारित अपने विचारों से लोगों को आकर्षित किया।
एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक, जिन्होंने बाबा के शुरुआती सफर में उनका मार्गदर्शन किया, ने कहा, "करीब 40 दिन पहले मैंने उनमें एक सच्चा साधक देखा। मैंने उन्हें वरिष्ठ गुरुओं से मिलवाया और महाकुंभ को उनकी आध्यात्मिक यात्रा के लिए एक दुर्लभ अवसर बताया।"
जुना अखाड़ा की पांच-चरणीय परंपरा
जुना अखाड़ा अपने साधुओं को दीक्षा देने के लिए पांच-चरणीय प्रक्रिया का पालन करता है, जिसमें विभूति, आशीर्वाद, पवित्र कंगन, वस्त्र, और मंत्रों का समावेश होता है। अखाड़ा के संतों ने बताया कि आईआईटी बाबा ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की थी और किसी गुरु को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया था।
भविष्य का संकेत
अखाड़ा ने यह भी कहा कि भविष्य में अगर उनके भाग्य में होगा, तो वे दीक्षा ले सकते हैं। लेकिन यह पूरी तरह उनके आत्म-निर्णय और आध्यात्मिक यात्रा पर निर्भर करता है।
आईआईटी बाबा का यह सफर दिखाता है कि आधुनिक प्रसिद्धि और प्राचीन परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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