ज्ञानवापी मामले में कोर्ट ने माना मुकदमा सुनने लायक, 22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

ज्ञानवापी मामले में कोर्ट ने माना मुकदमा सुनने लायक, 22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
12-09-2022 - 06:05 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

वाराणसी के जिला न्यायालय ने कथित तौर पर ज्ञानवापी मस्जिद मामले में श्रृंगार गौरी मामले को सुनने लायक माना है। दोपहर में करीब ढाई बजे डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया और कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। जज अजय कृष्ण का फैसला आते ही कोर्ट परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। वकीलों ने भी जमकर नारे लगाए।

कोर्ट के इस फैसले के बाद एक ओर हिंदू पक्ष में जबर्दस्त उल्लास का वातारण बन गया है तो दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष यानी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी अब आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। बहुत संभव है कि इस मामले पर पर मुस्लिम पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करे।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘न्यायालय ने बहुत अच्छा निर्णय दिया है। लोगों की भावनाओं के अनुरूप निर्णय है इसीलिए प्रदेशभर में खुशी की लहर है। यह उनका अधिकार है (उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती देना) लेकिन हम फैसले का सम्मान करेंगे और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को मजबूत करेंगे।’

एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘इस आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील होनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी। मेरा मानना है कि इस आदेश के बाद पूजा स्थल अधिनियम 1991 का उद्देश्य विफल हो जाएगा।’


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महल का कहना है कि वे और उनके साथी कोर्ट के पूरे फैसले को पढ़ने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष के वकील इस फैसले को पढ़ेंगे। उसके बाद रणनीति तय की जाएगी।
समझा जा रहा है कि मामले को सुनवाई लायक मानने के बाद हिंदू पक्ष की एक मांग पूरी हो गई है। अब इसके बाद हिंदू पक्ष श्रृंगार गौरी में 1993 से पहले वाली स्थिति बहाल की मांग कर सकता है। उल्लेखनीय है कि यहां पर पहले भी लगातार दर्शन पूजन होता रहा है। साल 1993 में बैरिकेडिंग बनाये जाने तक इस परिसर में हिंदू देवी देवताओं की पूजा होती रही है। यानी हिंदू पक्ष फिर से यहां पूजा की मांग कर सकता है।
चर्चाएं तो इस बात को लेकर भी हो रही हैं कि जब मामले की सुनवाई होगी तो हिंदू पक्ष मस्जिद का भारतीय पुरातत्व विभाग का सर्वेक्षण कराये जाने की मांग कर सकता है। सुनवाई में सर्वे रिपोर्ट पर भी जिरह हो सकती है और विशेषतौर पर शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग की जा सकती है।
1991 का वर्शिप एक्ट लागू नहीं
उल्लेखनीय है कि वाराणसी के जिला न्यायालय ने अपने फैसले में वर्शिप एक्ट को नहीं माना है। हिंदू पक्ष ने दलील दी थी कि जब तक जब तक किसी स्‍थल का धार्मिक स्‍वरूप तय नहीं हो जाता तब तक प्‍लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्‍ट-1991 प्रभावी नहीं माना जाएगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक उपासना स्थल पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि यह कानून काशी और मथुरा में चल रहे मामलों पर कोई असर नहीं डालता है। वो मामले चलते रहेंगे और सुनवाई जारी रहेगी। वाराणसी जिला न्यायालय ने भी कुछ ऐसा ही फैसला सुनाया है यानी ज्ञानवापी मामले में वर्शिप एक्ट लागू नहीं होगा।
ध्यान रखने योग्य बात यह भी है कि  1991 में लागू किया गया यह प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट के अनुसार 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आये किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। यदि कोई इस एक्ट का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माना और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।