‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय विवाद: NCERT के हलफनामे में दिवंगत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का नाम भी समिति में
कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय शामिल किए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच National Council of Educational Research and Training (NCERT) के हलफनामे ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया गया है कि पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली उच्चस्तरीय समिति में दिवंगत अर्थशास्त्री Bibek Debroy का नाम अब भी सदस्य के रूप में दर्ज..
नयी दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय शामिल किए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच National Council of Educational Research and Training (NCERT) के हलफनामे ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया गया है कि पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली उच्चस्तरीय समिति में दिवंगत अर्थशास्त्री Bibek Debroy का नाम अब भी सदस्य के रूप में दर्ज है, जबकि उनका निधन नवंबर 2024 में हो चुका था।
19 सदस्यीय समिति में अब भी नाम
NCERT के निदेशक Dinesh Prasad Saklani द्वारा 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग लर्निंग मटेरियल कमेटी (NSTC) में कुल 19 सदस्य हैं। इसी सूची में चौथे क्रम पर बिबेक देबरॉय का नाम दर्ज है।
देबरॉय पहले Economic Advisory Council to the Prime Minister (EAC-PM) के अध्यक्ष रह चुके थे। उनका नाम समिति में बने रहने से यह संकेत मिलता है कि उनकी मृत्यु के बाद से समिति का पुनर्गठन नहीं किया गया है।
शिक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने भी पुष्टि की कि देबरॉय के निधन के बाद NSTC का पुनर्गठन नहीं हुआ और समिति बाकी सदस्यों के साथ काम करती रही।
2023 में गठित हुई थी समिति
NSTC को 21 जुलाई 2023 को अधिसूचित किया गया था। इसके अध्यक्ष उस समय M C Pant थे, जो उस समय National Institute of Educational Planning and Administration (NIEPA) के चांसलर थे।
इस समिति की जिम्मेदारी कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तक और शिक्षण सामग्री तैयार करना और पुराने पाठ्यक्रमों में आवश्यक संशोधन करना है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे पहुंचा
यह मामला तब सामने आया जब कक्षा 8 की नयी सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े “भ्रष्टाचार” और “मामलों के भारी लंबित रहने” को चुनौतियों के रूप में उल्लेख किया गया।
इस पर आई खबर का पर Supreme Court of India ने स्वतः संज्ञान लिया और NCERT से जवाब मांगा।
पाठ्यपुस्तक विकास टीम पर सवाल
हलफनामे में NCERT ने स्वीकार किया कि संबंधित अध्याय को NSTC से औपचारिक समीक्षा के लिए नहीं भेजा गया बल्कि Textbook Development Team (TDT) ने इसे केवल कुछ सदस्यों के बीच डिजिटल रूप से साझा किया था।
TDT में
- Michel Danino
- Suparna Diwakar
- Alok Prasanna Kumar
शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
11 मार्च को सुनवाई के दौरान तीन जजों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कहा कि यदि हलफनामे की बात सही है तो पाठ्यक्रम बिना उचित मंजूरी के जारी किया गया।
कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह दिखाता है कि पाठ्यक्रम जारी करने की प्रक्रिया में पर्याप्त समीक्षा नहीं हुई।
NCERT ने माना “गंभीर चूक”
NCERT ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि अध्याय को NSTC से समीक्षा के लिए न भेजना “गंभीर और अक्षम्य गलती” थी और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जाएगी।
कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सरकारी फंड पाने वाले विश्वविद्यालयों और संस्थानों को निर्देश दिया कि वे TDT के तीनों सदस्यों से तत्काल दूरी बनाएँ।
साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को NSTC की संरचना की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेने की सलाह दी है। हालांकि समिति का पुनर्गठन करना या न करना पूरी तरह सक्षम प्राधिकरण के विवेक पर छोड़ दिया गया है।
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