छठी कक्षा में फेल... मेहनत के दम पर बनी यूपीएससी टॉपर, कलेक्टर पति से गजब का संयोग
<p>राज्य सरकार ने 72 आइएएस और 121 आरएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। राजस्थान के 50 जिलों में से 36 जिलों में कलक्टर बदले गए हैं। राजस्थान कैडर की आईएएस रुकमणि रियार का भी तबादला हुआ है।</p>
राज्य सरकार ने 72 आइएएस और 121 आरएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। राजस्थान के 50 जिलों में से 36 जिलों में कलक्टर बदले गए हैं। राजस्थान कैडर की आईएएस रुकमणि रियार का भी तबादला हुआ है। उन्हें जयपुर ग्रेटर नगर निगम आयुक्त पद पर लगाया है। रियार इससे पहले हनुमानगढ़ जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट थीं।
पति सिद्धार्थ सिहाग का भी तबादला
आईएएस सिद्धार्थ सिहाग को जयपुर में संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री के पद पर लगाया गया है। सिद्धार्थ इससे पहले चूरू के जिला कलेक्टर थे, दोनों आईएएस पति-पत्नी को एक साथ जयपुर में पोस्टिंग में मिली है।
कम उम्र में ही बोर्डिंग स्कूल भेजा
रुकमणि का जन्म सेवानिवृत्त डिप्टी डिस्ट्रिक अटॉर्नी, होशियारपुर बलजिंदर सिंह के यहां हुआ था। उन्हें छोटी सी उम्र में ही बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया था। वे बोर्डिंग स्कूल का दबाव सहन नहीं कर पाई और कक्षा 6 में फेल हो गई। फेल होने के बाद परिवार के लोग और शिक्षकों के सामने जाने की उनकी हिम्मत नहीं होती थी। वे ये सोचकर घबरा जाती थीं कि फेल होने को लेकर उनके घर वाले और शिक्षक उनके बारे में क्या सोचते होंगे। काफी समय तक इस बारे में सोचकर वह परेशान रहने लगी।
मेहनत से बदली किस्मत
इसके बाद रुकमणि ने सोचा कि अब वे कड़ी मेहनत करेंगी। धैर्य और योजना के साथ तैयारी की जाए तो दुनिया की किसी भी परीक्षा में पास होना संभव है। रुकमणि ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर्स डिग्री लेने के साथ-साथ कई एनजीओ के साथ काम भी किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पिता बलजिंदर सिंह, माता तकदीर कौर, अपने शिक्षकों और दोस्तों को दिया है। उन्होंने 2011 में यूपीएससी परीक्षा में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया था। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर्स डिग्री लेने के बाद उन्होंने पहले चांस में ही यह बड़ी कामयाबी हासिल की थी। खास बात यह है कि उन्होंने इस परीक्षा के लिए किसी प्रकार की कोई कोचिंग नहीं ली थी।
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