सबकी जान पर खतरा..9 सालों में होगी ग्लोबल वार्मिंग की सीमा पार, संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन COP 27 में दी बेहद चिंतित कर देने वाली रिपोर्ट

<p><em><strong>बाबा वेंगा ने अगले साल बड़े खतरे की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी, इस बार तो वैज्ञानिकों के भी होश उड़ गए हैं। ग्लोबल वार्मिंग के संकट के बीच मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन COP 27 में एक ऐसी चिंता भरी रिपोर्ट आई है जो पृथ्वी और पृथ्वीवासियों के लिए खतरनाक भी है।</strong></em></p>

सबकी जान पर खतरा..9 सालों में होगी ग्लोबल वार्मिंग की सीमा पार, संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन COP 27 में दी बेहद चिंतित कर देने वाली रिपोर्ट
12-11-2022 - 01:55 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

इजिप्ट के शर्म-अल-शेख में दुनियाभर के नेताओं और वैज्ञानिकों का धरती को बचाने की मुहिम को लेकर जमावड़ा लगा है। इस महासम्मेलन में कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं। ऐसे ही एक आंकड़े के मुताबिक जारी रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया के सभी देशों ने मिलकर इस साल अब तक 40.6 बिलियन टन CO2 वायुमंडल में छोड़ी है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए तत्काल बड़े कदम उठाने चाहिए। ग्लोबल कार्बन बजट 2022 के आंकड़ों के मुताबिक अगर अभी जैसा ही उत्सर्जन स्तर बना रहता है तो इस बात की 50 प्रतिशत संभावना है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस की वार्मिंग 9 सालों में पार हो जाएगी।

इसके साथ ही दुनिया के विनाश के लिए खाका तैयार हो सकता है। इसकी भविष्यवाणी कभी बाबा वेंगा ने भी की थी। यदि 9 साल में इतना तापमान बढ़ गया तो ग्लेशियर और तेजी से पिघलेंगे। प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगेगा। समुद्रों का जलस्तर बढ़ेगा, जिससे धरती के कई इलाके समुद्र की चपेट में आ जाएंगे

धरती पर रहने वालो पर होगा गंभीर असर

बता दें कि इसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ेगा। इको सिस्टम प्रभावित होने से बड़े पैमाने पर लोगों की मौत हो सकती है। पूर्व औद्योगिक 1850-1900 स्तरों के औसत की तुलना में पृथ्वी की वैश्विक सतह के तापमान में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। इस बढ़ोतरी को दुनिया भर में रिकॉर्ड सूखे, जंगल की आग और पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ का कारण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के आधे से अधिक CO2 उत्सर्जन के लिए चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ को जिम्मेदार बताया है। वैश्विक CO2 उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी  7 प्रतिशत है। डाटा यह बताता है कि चीन में 0.9% और EU में 0.8% की उत्सर्जन में अनुमानित कमी आई है लेकिन अमेरिका में 1.5% भारत में 6% और बाकी दुनिया में 1.7 % की वृद्धि हुई है।

तापमान बढ़ने के लिए जिम्मेदार देश

रिपोर्ट के अनुसार, चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ दुनिया के CO2 उत्सर्जन के आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। वैश्विक CO2 उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत है। संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में पेश आंकड़ों में चीन में उत्सर्जन में 0.9 प्रतिशत और यूरोपीय संघ में 0.8 प्रतिशत की कमी का अनुमान है लेकिन अमेरिका में 1.5 प्रतिशत, भारत में 6 प्रतिशत और शेष दुनिया में 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 

 

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।