रामलला के पुजारियों को मिलती है कितनी सैलरी, क्या इन्हें भी दिया जाता है टीए-डीए?
<p><em><strong>मंदिर निर्माण के साथ ही रामलला मंदिर की सारी व्यवस्था भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पास आ गई है। ट्रस्ट ही अब पुजारियों और सेवकों की सैलरी निर्धारित करता है।</strong></em></p>
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण जोर-शोर से चल रहा है। 22 जनवरी, 2024 वो तारीख है, जिस दिन राम मंदिर के दर्शन के लिए करोड़ों भक्तों का इंतजार खत्म हो जाएगा। इस दिन भगवान रामलला गर्भगृह में विराजमान होंगे। अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को रामलला विराजमान होंगे। रामलला के पूजन के लिए राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से पीएम मोदी को न्योता भेजा गया गया है।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी पांच निभाते हैं। इनमें एक मुख्य पुजारी और 4 सहायक पुजारी हैं। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या श्रीराम मंदिर के पुजारियों को सैलरी भी मिलती है? अगर वेतन मिलता है तो वो कितना है?
राम मंदिर में रामलला की पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों को तो वेतन मिलता ही है, साथ ही मंदिर की सेवा में लगे अन्य सेवकों को भी वेतन दिया जाता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पुजारियों और सेवकों को वेतन देता है। अयोध्या में आचार्य सत्येंद्र दास रामलला के मुख्य पुजारी हैं। वे पिछले करीब 28 वर्षों से यह दायित्व निभा रहे हैं।
कितना मिलता है वेतन?
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येद्र दास को अब 32,900 रुपये वेतन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से दिया जाता है। वहीं, प्रत्येक सहायक पुजारी को 31 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। मुख्य पुजारी और सहायक पुजारी तथा सेवादारों के वेतन में ट्रस्ट ने पिछले 6 महीने में ही दूसरी बार इजाफा किया है। अभी कुछ दिन पहले ही मुख्य पुजारी के वेतन को 25 हजार रुपये बढ़ाकर 32,900 रुपये किया गया था। इसी तरह सहायक पुजारी के वेतन को भी 20 हजार से बढ़ाकर 31,000 रुपये महीना किया गया। मंदिर के सेवकों को भी वेतन दिया जाता है। मंदिर के कोठारी और भंडारी का वेतन 24,440 है। वहीं, भृत्य को भी अब 24,440 रुपये सैलरी दी जा रही है।
पहले कोर्ट से लेनी पड़ती थी इजाजत
सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या में रामजन्भूमि पर ऐतिहासिक फैसला देने के बाद श्री राम जन्मभूमि परिसर में भव्य राम मंदिर निर्माण शुरू हुआ है। मंदिर निर्माण के साथ ही रामलला मंदिर की सारी व्यवस्था भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पास आ गई है। मंदिर निर्माण के साथ उससे जुड़े चंदे और हर व्यवस्था के साथ चढ़ावे के खर्च का हिसाब-किताब भी ट्रस्ट रखने लगा।
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