Makar Sankranti 2023 : जानिये कब है मकर संक्रांति और क्या है इसका महत्व, किस मुहूर्त में कैसे इसे मनाना श्रेयस्कर रहेगा..!
<p><em><strong>Makar Sankranti 2023 : Makar Sankranti पर सुबह 07 बजकर 15 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 46 मिनट तक Makar Sankranti का पुण्यकाल रहेगा। इस अवधि में स्नान, दान-धर्म के कार्य बहुत ही शुभ माने जाते हैं। चूंकि मकर संक्रांति का पर्व रविवार के दिन पड़ रहा है तो इससे त्योहार का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि यह वार सूर्य देव को ही समर्पित है। इसके अलावा, इस दिन दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा</strong></em><strong> </strong></p>
भारत में प्रतिवर्ष Makar Sankranti का पर्व मनाया जाता हैl भारत के हिंदू पंचांग में ज्यादातर तिथियां चंद्रमा की गति पर आधारित होती है लेकिन भारत में प्रत्येक वर्ष मनाया जाने वाला मकर संक्रांति का दिन, सूर्य की गति पर निर्भर करता है l Makar Sankranti का शाब्दिक अर्थ समझे तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है l पहला शब्द है मकर जिसका तात्पर्य मकर राशि से है एवं दूसरा शब्द है संक्रांति जिसका तात्पर्य है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में गमन l जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे सौरमंडल में 12 राशियां होती है एवं सूर्य प्रत्येक राशि को 1 महीने में पार कर लेते हैं इसलिए पूरे वर्ष में कुल मिलाकर 12 संक्रांति आती है l इन 12 सक्रांतियों में से चर राशियों मेष, कर्क , तुला एवं मकर में सूर्य की संक्रांति के फलस्वरूप मेष संक्रांति, कर्क सक्रांति, तुला संक्रांति एवं मकर संक्रांति प्रमुख हैं l इनमें से सभी अधिक मान्यता मकर संक्रांति को दी जाती है जिसके पीछे कई पौराणिक एवं वैज्ञानिक कारण हैं l इसे उत्तरायण के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन से सूर्य उत्तर की ओर अपनी यात्रा शुरू करता है जिसे उत्तरायण यात्रा के रूप में जाना जाता है।
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मकर संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व :- जैसा कि हम सभी जानते हैं की सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं l मकर राशि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण से शुरू होती है जिसके स्वामी ग्रह सूर्य महाराज है l लेकिन, दस विश्वदेवों को उत्तराषाढ़ा का अधिपति देवता माना गया है। विश्व देव कोई एक देव नहीं है बल्कि दस अलग-अलग देवता हैं जो पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं l जिनके आशीर्वाद से हमें अपने छोटे से छोटे एवं बड़े से बड़े कर्मों में सफलता मिलती है l वायु पुराण में यह उल्लेख मिलता है कि धर्म की विश्वा नामक पत्नी से 10 विख्यात पुत्रों का जन्म हुआ जिन्हें विश्व देव कहा जाता है l इनके नाम हैं..
- शुभता
- सत्य
- इच्छाशक्ति
- दक्षता
- काल
- आकांक्षा
- संकल्प
- पितर
- आभा
- शिखर
इस प्रकार सूर्य देव मकर संक्रांति के दिन इन 10 विश्व देव द्वारा प्रदत्त गुणों को चेतन करते हैं इसलिए इस पर्व का अत्यधिक महत्व बताया गया है l
मकर सक्रांति का वैज्ञानिक महत्व :- जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मकर संक्रांति पर सूर्य मकर रेखा को पारकर कर्क रेखा की तरह गतिमान होते हुए उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करते हैं l इस तरह उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की ऊष्मा एवं प्रकाश का आसानी से उपलब्धता जन जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है इसीलिए विश्व की लगभग 90 फीसदी जनसंख्या उत्तरी गोलार्ध में रहती है l
मकर सक्रांति 2023:- वैसे तो मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को ही आती है मगर इस वर्ष 2023 में, हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी दिन शनिवार को सूर्य देव रात 8 बजकर 14 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। दरअसल रात्रि प्रहर में स्नान, दान-धर्म के कार्य वर्जित होते हैं इसलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सही नहीं है। उदिया तिथि के चलते अगले दिन यानी यानी 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व मनाएं l
मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त -15 जनवरी को मकर संक्रांति पर सुबह 07 बजकर 15 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 46 मिनट तक मकर संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। इस अवधि में स्नान, दान-धर्म के कार्य बहुत ही शुभ माने जाते हैं। चूंकि मकर संक्रांति का पर्व रविवार के दिन पड़ रहा है तो इससे त्योहार का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि यह वार सूर्य देव को ही समर्पित है। इसके अलावा, इस दिन दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा और दोपहर 02 बजकर 16 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 58 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा l
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