राजस्थान के निवासियों को नहीं मिलेगा भर्ती में आरक्षण...विपक्ष के सवाल पर सरकार का साफ इनकार
<p><em><strong>पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के सवाल पर सरकार का इनकार, विधानसभा अध्यक्ष ने दिया सुझाव..</strong></em></p>
राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य की भर्तियों में स्थानीय निवासियों को आरक्षण देने का कोई प्रावधान नहीं है। फिलहाल 64 प्रतिशत पदों पर एससी, एसटी, ओबीसी, ईबीसी, भूतपूर्व सैनिकों का आरक्षण है। मंगलवार को विधानसभा के प्रश्नकाल में विधायक वासुदेव देवनानी के सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री बी.डी. कल्ला ने ये बात कही। वहीं, इस पर विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने सरकार को तमिलनाडु पैटर्न अपनाने का सुझाव दिया।
देवनानी ने सवाल किया था कि क्या सरकार भर्तियों में स्थानीय निवासियों को आरक्षण देने का विचार रखती है? इस पर कल्ला ने विभिन्न राज्यों से सूचना प्राप्त की गई। वहां स्थानीय भाषा का पेपर पास करना अनिवार्य है। लेकिन राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता नहीं है। यह मामला अभी केंद्र के विचाराधीन है।
उन्होंने विभिन्न राज्यों के भर्ती पैटर्न का उल्लेख भी किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि जो जवाब दिया गया है उसमें तमिलनाडु का उल्लेख है। जहां भर्ती के लिए स्थानीय विद्यालय में पढ़ा होना अनिवार्य है। यह संविधान के भी कांटेररी नहीं है। ऐसे में सरकार को एक प्रावधान करना चाहिए कि भर्ती में स्थानीय विद्यालयों में पढ़ा-लिखा ही योग्य माना जाए। इससे बाहर वाले स्वतः अयोग्य हो जाएंगे। इसे जरूर देखना चाहिए क्योंकि इससे राज्य के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
देवनानी ने पूछा कि राज्य में 27 लाख बेरोजगार हैं। यहां वर्तमान में राज्य सरकार की नौकरियों के बाहर के कितने लोग हैं। कल्ला ने बताया कि आरपीएससी के माध्यम से 2012 से अब तक 1.05 प्रतिशत बाहर के अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। वहीं अधीनस्थ कर्मचारी आयोग से इस अवधि में 0.90 प्रतिशत बाहर के लोग चयनित हुए हैं।
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