बार बार चुनावों के झंझट से मुक्ति...संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार ला सकती है 'एक देश-एक चुनाव' बिल

<p>केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में पांच बैठकें होंगी। संसदीय कार्यमंत्री ने आज दोपहर बाद सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। &nbsp;सूत्रों के मुताबिक, विशेष सत्र में मोदी सरकार &#39;एक देश-एक चुनाव&#39; पर बिल लेकर आ सकती है। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने के मसले पर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस विचार का समर्थन कर इसे आगे बढ़ाया है।&nbsp;</p>

बार बार चुनावों के झंझट से मुक्ति...संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार ला सकती है 'एक देश-एक चुनाव' बिल
31-08-2023 - 11:49 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

देश में 'वन नेशन-वन इलेक्शन' को लेकर काफी समय से बहस चल रही है।  जनवरी में लॉ कमीशन ने इसको लेकर राजनीतिक दलों से छह सवालों के जवाब मांगे थे।  सरकार इसे लागू कराना चाहती है तो वहीं कई राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं। 

क्या होता है 'वन नेशन-वन इलेक्शन' में 
'वन नेशन-वन इलेक्शन' के तहत देश में लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव एक साथ कराया जाता है। गौरतलब है कि देश में इनके अलावा पंचायत और नगरपालिकाओं के चुनाव भी होते हैं किन्तु एक देश एक चुनाव में इन्हें शामिल नहीं किया जाता। 

क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल
बीते लगभग  पांच वर्षों से बार बार  इस बात पर चर्चा हो रही है कि देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव करवाए जाने चाहिए। भाजपा और  केन्द्र सरकार के मंत्री इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार अपने भाषणों में यह ज़िक्र कर चुके हैं। 

ये तर्क है बिल के पक्ष में 
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिलके पक्ष में सरकार और भाजपा का तर्क है कि देश भर में हर साल कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं, जिसके चलते सरकारी तंत्र को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बार-बार चुनाव आचार संहिता लगने के कारण विकास योजनाएं प्रभावित रहती हैं। साथ ही आम आदमी को भी तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आवश्यक है कि देशभर के राज्यों में विधानसभा और केंद्र सरकार के लिए लोकसभा चुनाव एक साथ करवाए जाएं। इसीलिए केंद्र सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन बिल तैयार किया है। जिसे पास करवाने के लिए 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है।

पहले भी हो चुके हैं 'वन नेशन-वन इलेक्शन'
'एक देश एक चुनाव' कोई अनूठा प्रयोग नहीं है।  1952, 1957, 1962, 1967 में ऐसा हो चुका है, जब लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ करवाए गए थे।  यह क्रम तब टूटा जब 1968-69 में कुछ राज्यों की विधानसभाएं विभिन्न कारणों से समय से पहले भंग कर दी गई। 

संविधान के अनुच्छेद 85 में संसद का सत्र बुलाने का प्रावधान है। इसके तहत सरकार को संसद के सत्र बुलाने का अधिकार है। संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति निर्णय लेती है जिसे राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप दिया जाता है, जिसके जरिए सांसदों को एक सत्र में बुलाया जाता है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर देश भर में बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया और खबरिया न्यूज़ चैनलों पर यह मसला छाया हुआ है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।