' दानिश ,कलमा पढ़ लो ' पाक की संसद में धर्मान्तरण व मुनाफाखोरी का दर्द बयां किया हिन्दू सांसद दानिश कुमार ने
<p><em>"सर मैं आपको बताता हूं, यहां पर मेरे दोस्त हैं जो मुझे कहते हैं कि दानिश कुमार कलमा पढ़ लो, मुस्लिम हो जाओ। तो ऐसे दानिश कुमार मुस्लमान बन जाए। पहले आप उन शैतानों को जो मुनाफाखोर हैं, उन्हें मुस्लिम बनाएं। फिर दानिश कुमार को तबलीग (उपदेश) दें। मैं चाहता हूं कि ये लोग वादा करें जब तक ये उन्हें (मुनाफाखोरों को) मुस्लिम नहीं बनाते, तब तक मुझे उपदेश नहीं देंगे।" ये पूरा वक्तव्य है पाकिस्तान के सांसद दानिश कुमार का, जिन्होंने परसों पाकिस्तानी संसद की कौमी असेम्बली (National Assembly) के उच्च सदन 'सेनेट' में धर्मांतरण के दबाव का अपना दर्द साझा किया।</em></p>
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक के साथ किस तरह का व्यवहार होता है, ये किसी से छिपा नहीं है। आम से खास तक धर्मांतरण का दबाव डालना कोई नई बात नहीं है। सांसद दानिश कुमार की ये गवाही संसद में गैर मुस्लिमों के साथ ज्यादती का यह एक नमूना है । दबाव के चलते आक्रामक अंदाज में बताया कि कैसे उन पर मुस्लिम बनने का दबाव डाला जा रहा है।
रमजान में केले के दाम 450 तक बेच रहे हैं मुनाफाखोर
सांसद ने शुरुआत रमजान के पवित्र महीने में हो रही मुनाफाखोरी के सवाल से की। संसद में अपनी बात रखते हुए उन्होंने पाकिस्तान के दयनीय हालात की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि शर्म की बात है कि मुनाफाखोरी के चक्कर में रमजान पवित्र महीने से पहले जिस केले की कीमत 150 रुपए थी। अब यह 400-450 रुपए पहुंच गई है। इसी तरह दूसरे सामानों की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। अपनी बात पूरी करने के साथ ही उन्होंने गुजारिश करते हुए कहा कि संसद में मुनाफाखोरों के खिलाफ रूलिंग पास हो।
फायदे के लिए अपने ही भाई का चूसते हैं खून
दानिश ने इसके बाद जो कहा वो पाकिस्तान की जम्हूरियत के नाम पर किए जा रहे ड्रामे की कलई खोलता है। उन्होंने कहा है, “मैं गैर-मुस्लिम हूं लेकिन मुझे शर्म आ रही है कि यहां कैसे लोग हैं जो अपने मुस्लिम भाइयों का ही खून चूस रहे हैं।
कौन हैं दानिश कुमार?
दानिश कुमार पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन सीनेट के मेम्बर हैं। वो अल्पसंख्यकों के मुद्दों को सड़क से संसद तक उठाने में माहिर माने जाते हैं। साल 2018 में बाप (BAP) यानी बलूचिस्तान अवामी पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीट टिकट दी थी। इससे पहले 2015 में सिर्फ एक वोट से हार गए थे। वे वैसे तो बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखते हैं और खुद को राजनीतिज्ञ नहीं बल्कि आम लोगों की आवाज़ मानते हैं।
इससे पहले वो बलूचिस्तान की प्रांतीय विधानसभा के सदस्य (विधायक) भी रह चुके हैं। अक्सर कई प्लेटफॉर्म पर वो बलूचिस्तान के मुद्दे उठाते रहे हैं। लोगों के बीच वो खासे पसंद किए जाते हैं। वो अपने क्षेत्रफल के हिसाब से ज्यादा हकों की डिमांड करते रहे हैं।
UN ने भी जताया था ऐतराज
बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हालात पर संयुक्त राष्ट्र भी फिक्र जाहिर कर चुका है। मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इसी साल जनवरी में पाकिस्तान में गैर मुस्लिम बच्चियों के अपहरण, जबरन विवाह और नाबालिग लड़कियों के धर्मांतरण के मुद्दे को गंभीर माना था। पाकिस्तानी सरकार से कहा था कि इन स्थितियों को लेकर संवेदनशीलता बरती जाए। विशेषज्ञों ने कहा था, “हमें यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि 13 साल से कम उम्र की बच्चियों को उनके घरों से अगवा किया जा रहा है। इन बच्चियों की तस्करी की जा रही है। कभी-कभी उन्हें दोगुनी उम्र के शख्स से शादी करने और इस्लाम कबूल करने को मजबूर किया जाता है। यह सब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है।”
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