चीन का टूटा अहंकार ! दुनिया में सबसे तीव्र गति से बढ़ी भारत की इकॉनमी ,पहली तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 7.8%
<p>अर्थव्‍यवस्‍था के मोर्चे पर सरकार और देशवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 31 अगस्त 2023 को बताया कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गया। यह पिछली तिमाही से 1.7 प्रतिशत अधिक है। अगर भारत के प्रतिद्वंद्वी चीन की बात करें तो अप्रैल-जून तिमाही में उसकी जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत है।</p>
किसने लगाए थे क्या अनुमान
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। वहीं, कुछ अर्थशास्त्रियों ने रॉयटर्स सर्वेक्षण में सकल घरेलू उत्पाद दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों ने विकास दर 8.3 प्रतिशत आँकी थी।सभी एक्सपर्ट और रेटिंग एजेंसियों के अनुमानों को आशावान करते हुए भारत की जीडीपी (India GDP) ने अप्रैल-जून में 4 तिमाहियों की सबसे तेज बढ़त दर्ज की है।
निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च पर बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण
मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय निजी क्षेत्र ने निवेश शुरू किया है और आगामी तिमाहियों में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को लेकर आशावाद है। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में ऊँची ब्याज दरों से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रभाव को संभालने में भारत की क्षमता पर आश्वासन व्यक्त किया। निर्मला सीतारमण ने जोर दिया कि कुछ उत्पादों को मुद्रास्फीति के दबाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन Comprehensive Basket Inflation की समग्र प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है।
क्या है Comprehensive Basket Inflation
दरअसल, Comprehensive Basket Inflation में वृद्धि का अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में सामान्य रूप से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं। यह बढ़ती लागत और कम खरीदारी शक्ति के कारन हो सकता है। यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापा जाता है, जो एक इंडेक्स है। ये एक निश्चित समय अवधि में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को ट्रैक करता है।
दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है भारत के हालात
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि भारत की तिमाही जीडीपी वृद्धि कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार और आरबीआई वित्त वर्ष 2024 में 6.5% की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को बरकरार रखने में सहज है।
उन्होंने आगे कहा, “यह जानना अच्छा है कि राज्य भी पूंजीगत व्यय सृजन की उस मुहिम में शामिल हो रहे हैं, जिसका केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से समर्थन कर रही है। निजी पूंजी निर्माण अब आगे बढ़ने का इंतजार नहीं कर रहा है। यह चल निकला है। कुल मिलाकर, मुद्रास्फीति के नियंत्रण से बाहर होने को लेकर चिंता का कोई वास्तविक कारण नहीं है।”
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