शिवसेना रैलियांः ठाकरे ने बगावत पर शिंदे को कहा गद्दार तो शिंदे ने कहा यह तो गदर है..!

शिवसेना रैलियांः ठाकरे ने बगावत पर शिंदे को कहा गद्दार तो शिंदे ने कहा यह तो गदर है..!
06-10-2022 - 06:17 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

बुधवार, 5 अक्टूबर को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई मे माहौल गर्म था। सभी मना रहे थे कि इस राजनीतिक गर्मी से तप रह मुंबई में शिवसेना के दोनों गुटों उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की पारंपरिक दशहरा रैलियां शांतिपूर्वक हो जाएं। रैलियां शांतिपूर्ण हुईं अलबत्ता शब्द वाणों से राजनीतिक गर्मी ही बढ़ी। मुंबई के शिवाजी पार्क में ठाकरे गुट ने जहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को गद्दार बताया तो वहीं एकनाथ शिंदे ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपनी बगावत को गदर करार दिया।

मुंबई के शिवाजी पार्क में शिवसेना हर वर्ष पारंपरिक तौर पर दशहरे पर रैली करती रही है। इस बार दो गुटों में बंट जाने के बाद दोनों शिंदे और ठाकरे गुटों के बीच शिवाजी पार्क में रैली को लेकर टकराहट बढ़ गई थी। दोनों को ही वहां दशहरा रैली की अनुमति नहीं मिली थी लेकिन ठाकरे गुट ने बांबे हाईकोर्ट से अनुमति ली  और बाद में शिंदे गुट को बांद्रा-कुर्ला कॉम्पेल्क्स में रैली की अनुमति मिली।

उद्धव ठाकरे ने जहां करीब 45 मिनट तक भाषण दिया, वहीं एकनाथ शिंदे उनसे दोगुना करीब 90 मिनटों का भाषण दिया। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में महाराष्ट्र में सरकार चला रहे एकनाथ शिंदे ने इस साल जून में 39 विधायकों के साथ शिवसेना से बगावत कर दी थी। इससे उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके दोनों ही गुट अपनी-अपनी रैलियों में भीड़ दिखाकर जनमसर्थन की ताकत दिखाना चाहते थे।

दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे और उनके साथियों के लिए कहा कि विश्वासघाती का कलंक कभी नहीं मिटेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए जब मैं अस्वस्थ था और मेरी सर्जरी हुई थी, तो मैंने वरिष्ठ मंत्री होने के नाते उन्हें जिम्मेदारी दी थी लेकिन उन्होंने यह सोचकर मेरे खिलाफ साजिश रची कि मैं फिर कभी पैरों पर खड़ा नहीं हो पाऊंगा। आज का रावण ज्यादा सिर होने की वजह से नहीं बल्कि खोखे (पैसे) की वजह से जाना जाता है.

उद्धव ठाकरे ने कहा,''हर साल की तरह इस साल भी रावण जलेगा लेकिन इस बार का रावण अलग है। वक्त के साथ रावण का चेहरा बदलता था, इस बार कितने चेहरों का है.. ये सिरों का नहीं बल्कि 50 खोके (करोड़ रुपये) का खोकासुर है,जिन्हें हमने जिम्मेदारी दी वो कटप्पा निकले जिन्होंने साजिश रची, वे कटपप्पा हैं। ठाकरे ने सफाई दी कि भारतीय जनता पार्टी ने पीठ में खंजर घोंपा था और उन्हें सबक सिखाने के लिए ही हमने महाविकास आघाड़ी बनाई थी। आप लोग बताएं कि मेरा फैसला सही था या नहीं, क्या मैंने कभी हिंदुत्व का मुद्दा छोड़ा?'

ठाकरे ने कहा,अगर आपको लगता है कि मुझे शिवसेना अध्यक्ष नहीं रहना चाहिए,तो मैं इस्तीफा दे दूंगा लेकिन सत्ता लोलुप होने की एक सीमा होती है। विश्वासघात करने के बाद, वह अब पार्टी का चुनाव चिह्न भी चाहते हैं और पार्टी अध्यक्ष भी कहलाना चाहते हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिंदे अब शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की विरासत को अपनाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें अपने पिता के नाम पर वोट नहीं मिलेगा।

उधर, बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमने गद्दारी नहीं की बल्कि यह गदर था। हम गद्दार नहीं हैं बल्कि बाला साहेब के सैनिक हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर बाला साहेब के मूल्यों को बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कौन असली गद्दार है जिसने सत्ता के लालच में हिन्दुत्व से गद्दारी की। उन्होंने अपनी बगावत को शिवसेना को बचाने, बाला साहेब के मूल्यों के संरक्षण, हिन्दुत्व और महाराष्ट्र की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम बताया। शिंदे ने कहा, क्या आपको (उद्धव ठाकरे) बाल ठाकरे के मूल्यों से समझौता करने के लिए पद (शिवसेना अध्यक्ष) पर बने रहने का अधिकार है? 

शिंदे ने कहा, 'हमने गद्दारी नहीं की, गदर किया। आप हमको बाप चोर बोलते हैं? अरे, आपने अपने बाप के विचारों को बेच दिया? पिछले दो महीनों से हमें गद्दार कह रहे हैं और बाकी कुछ नहीं हैं बोलने के लिए आपके पास। उन्होंने कहा कि असली गद्दारी वर्ष 2019 में हुई जब शिवसेना-बीजेपी गठबंधन तोड़ कर आपने सरकार बनाई। चुनाव में एक तरफ बाला साहब की फोटो तो दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी की फोटो लगाई थी, लगाई थी कि नहीं..? जनता ने तब चुना लेकिन आपने जनता के विश्वास को तोड़ा।'

 

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।