आज आमलकी एकादशी 2024 पर जाने मुहूर्त कथा और अनेक उपायों सहित सारी जानकारी

<p>रंगभरी एकादशी 20 मार्च को है। यदि आप भी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो रंगभरी एकादशी पर कुछ खास उपाय करना न भूलें।रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi 2024) को आमलकी एकादशी भी कहते हैं। चलिए जानते हैं पंडित सनत कुमार खंपरिया से कि कब प्रारम्भ हो रही है इस साल की आमलकी &nbsp;एकादशी ,साथ ही इस &nbsp;पर क्या उपाय किए जाने चाहिए।</p>

आज  आमलकी एकादशी 2024 पर जाने मुहूर्त कथा और अनेक उपायों सहित सारी जानकारी
20-03-2024 - 12:10 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

 रंगभरी एकादशी 2024 मुहूर्त (Rangbhari Ekadashi 2024 Muhurat)

रंगभरी एकादशी प्रारंभ तिथि: 20 मार्च रात 00:21 मिनट पर

रंगभरी एकादशी समाप्ति तिथि: 21 मार्च रात 2:22 मिनट तक

 

आमलकी या रंगभरी एकादशी व्रत पारण के नियम

इस व्रत में अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।

 व्रत पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लें।

 व्रत पारण हरि वासर के वक्त नहीं करना चाहिए। आपको बता दें हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि को कहते हैं।

 इस व्रत तोड़ने का सबसे अच्छा समय प्रातः काल का होता है।

 

आमलकी एकादशी व्रत कथा


अट्ठासी हजार ऋषियों को सम्बोधित करते हुये सूतजी ने कहा, "हे विप्रों! प्राचीन काल की बात है। महान राजा मान्धाता ने वशिष्ठजी से पूछा- हे वशिष्ठ जी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो ऐसे व्रत का विधान बताने की कृपा करें, जिससे मेरा कल्याण हो।"

महर्षि वशिष्ठ जी ने कहा, "हे राजन! सब व्रतों से उत्तम और अन्त में मोक्ष देने वाला आमलकी एकादशी का व्रत है।"
राजा मान्धाता ने कहा, "हे ऋषिश्रेष्ठ! इस आमलकी एकादशी के व्रत की उत्पत्ति कैसे हुयी? इस व्रत के करने का क्या विधान है? हे वेदों के ज्ञाता! कृपा कर यह सब वृत्तान्त मुझे विस्तारपूर्वक बतायें।"

महर्षि वशिष्ठ ने कहा, "हे राजन! मैं तुम्हारे समक्ष विस्तार से इस व्रत का वृत्तान्त कहता हूँ- यह व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में होता है। इस व्रत के फल के प्रभाव से सभी पाप समूल नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत का पुण्य एक सहस्र गौदान के फल के समान है। आँवले (आमलकी) की महत्ता उसके गुणों के अतिरिक्त इस बात में भी है कि, इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के श्रीमुख से हुयी है। अब मैं आपको एक पौराणिक कथा सुनाता हूँ। ध्यानपूर्वक श्रवण करो-

"प्राचीन समय में वैदिक नाम का एक नगर था। उस नगर में ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, शूद्र, चारों वर्ण के मनुष्य प्रसन्तापूर्वक निवास करते थे। नगर में सदैव वेदध्वनि गूँजा करती थी।उस नगरी में कोई भी पापी, दुराचारी, नास्तिक आदि न था।उस नगर में चैत्ररथ नामक चन्द्रवंशी राजा राज्य करता था। वह उच्चकोटि का विद्वान तथा धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था, उसके राज्य में कोई भी निर्धन एवं लोभी नहीं था। उस राज्य के सभी लोग भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। वहाँ के छोटे-बड़े सभी निवासी प्रत्येक एकादशी का उपवास करते थे।

एक बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी नामक एकादशी आयी। उस दिन राजा एवं प्रत्येक प्रजाजन, वृद्ध से बालक तक ने आनन्दपूर्वक उस एकादशी को उपवास किया। राजा अपनी प्रजा के साथ मन्दिर में आकर कलश स्थापित करके तथा धूप, दीप, नैवेद्य, पञ्चरत्न, छत्र आदि से धात्री का पूजन करने लगा। वे सभी धात्री की इस प्रकार स्तुति करने लगे - "हे धात्री! आप ब्रह्म स्वरूपा हैं। आप ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न हो तथा सभी पापों को नष्ट करने वाली हैं, आपको नमस्कार है। आप मेरा अर्घ्य स्वीकार करो। आप श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा सम्मानित हैं, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, मेरे सभी पापों का हरण करो।"

उस मन्दिर में रात को सभी ने जागरण किया। रात के समय उस स्थान पर एक बहेलिया आया। वह महापापी तथा दुराचारी था।अपने कुटुम्ब का पालन वह जीव-हिंसा करके करता था। वह भूख-प्यास से अत्यन्त व्याकुल था, कुछ भोजन पाने की इच्छा से वह मन्दिर के एक कोने में बैठ गया।उस स्थान पर बैठकर वह भगवान विष्णु की कथा तथा एकादशी माहात्म्य सुनने लगा। इस प्रकार उस बहेलिये ने सम्पूर्ण रात्रि अन्य लोगों के साथ जागरण कर व्यतीत की। प्रातःकाल सभी लोग अपने-अपने निवास पर चले गये। इसी प्रकार वह बहेलिया भी अपने घर चला गया और वहाँ जाकर भोजन किया।

कुछ समय व्यतीत होने के पश्चात उस बहेलिये की मृत्यु हो गयी।हालाँकि, जीव-हिंसा करने के कारण वह घोर नरक का भागी था, परन्तु उस दिन आमलकी एकादशी व्रत तथा जागरण के प्रभाव से उसने राजा विदुरथ के यहाँ जन्म लिया। 
उसका नाम वसुरथ रखा गया। बड़ा होने पर वह चतुरङ्गिणी सेना सहित तथा धन-धान्य से युक्त होकर दस सहस्र ग्रामों का सञ्चालन करने लगा।वह तेज में सूर्य के समान, कान्ति में चन्द्रमा के समान, वीरता में भगवान विष्णु के समान तथा क्षमा में पृथ्वी के समान था। वह अत्यन्त धार्मिक, सत्यवादी, कर्मवीर और विष्णु-भक्त था। वह प्रजा का समान भाव से पालन करता था। दान देना उसका नित्य का कर्म था।

एक समय राजा वसुरथ शिकार खेलने के लिये गया। दैवयोग से वन में वह रास्ता भटक गया और दिशा का ज्ञान न होने के कारण उसी वन में एक वृक्ष के नीचे सो गया। कुछ समय पश्चात पहाड़ी डाकू वहाँ आये और राजा को अकेला देखकर 'मारो-मारो' चिल्लाते हुये राजा वसुरथ की ओर दौड़े। वह डाकू कहने लगे कि, "इस दुष्ट राजा ने हमारे माता-पिता, पुत्र-पौत्र आदि समस्त सम्बन्धियों को मारा है तथा देश से निकाल दिया। अब हमें इसे मारकर अपने अपमान का बदला लेना चाहिये।"

इतना कह वे डाकू राजा को मारने लगे और उस पर अस्त्र-शस्त्र का प्रहार करने लगे। डाकुओं के वह अस्त्र-शस्त्र राजा के शरीर से स्पर्श होते ही नष्ट होने लगे तथा राजा को वह शस्त्र पुष्पों के समान प्रतीत होने लगे। कुछ समय पश्चात् प्रभु इच्छा से उन डाकुओं के अस्त्र-शस्त्र उन्हीं पर प्रहार करने लगे, जिससे वे सभी डाकू मूर्च्छित हो गये।

उसी समय राजा के शरीर से एक दिव्य देवी प्रकट हुयी। वह देवी अत्यन्त सुन्दर थी तथा सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलङ्कृत थी। उसकी भृकुटी टेढ़ी थी। उसके नेत्रों से क्रोध की भीषण लपटें निकल रही थीं।उस समय वे लपटें काल के समान प्रतीत हो रही थीं। उसने देखते-ही-देखते उन सभी डाकुओं का समूल नाश कर दिया।

नींद से उठने पर राजा ने वहाँ अनेक डाकुओं को मृत पड़ा देखा। वह सोचने लगा किसने इन्हें मारा? इस वन में कौन मेरा हितैषी रहता है?राजा वसुरथ ऐसा विचार कर ही रहा था कि उसी समय आकाशवाणी हुयी - "हे राजन! इस संसार में भगवान विष्णु के अतिरिक्त तेरी रक्षा कौन कर सकता है!"
इस आकाशवाणी को सुनकर राजा ने भगवान विष्णु को स्मरण कर उन्हें प्रणाम किया, तत्पश्चात् अपने नगर को वापस आ गया और सुखपूर्वक राज्य करने लगा।

महर्षि वशिष्ठ ने कहा- "हे राजन! यह सब आमलकी एकादशी के व्रत का प्रभाव था, जो मनुष्य एक भी आमलकी एकादशी का व्रत करता है, वह प्रत्येक कार्य में सफल होता है तथा अन्त में वैकुण्ठ धाम को पाता है।"

रंगभरी एकादशी के उपाय

कार्य में तरक्की के लिए
अगर आपके कार्य सफल नहीं हो रहे हैं। तो आपको अमालकी एकादशी (Amalaki Ekadashi 2024) के दिन आंवले का पेड़ लगाना चाहिए। इससे आपके जीवन में धन संपत्ति आती है। रंगभरी एकादशी का दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है।

हर कार्य में सफलता के उपाय
अगर आपको लगातार प्रयास किए जाने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है तो आपको रंगभरी एकादशी के लिए 21 ताजे पीले फूलों की माला भगवान विष्णु को चढ़ाना चाहिए। साथ इस अगर आप खोए की मिठाई बनाकर भी भगवान को भोग लगाएं। इससे आपको हर कार्य में सफलता मिलती है।

सभी मनोकामनाओं को पूरा करने के उपाय
यदि आपकी कोई मनोकामना पूरी नहीं हो रही है तो आपको आमलकी एकादशी के दिन आंवले का भोग भगवान को लगाकर उसे स्वयं ग्रहण करना चाहिए।
इससे आपकी सभी मनोकामना पूरी हो सकती है।

धन प्राप्ति के उपाय
अगर आप आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं तो ऐसे में धन प्राप्ति के लिए आप एक उपाय कर सकते हैं। इसके अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद एकाक्षी नारियल भगवान विष्णु को अर्पित करें। इसके बाद इस नारियल को एक पीले कपड़ें में बांध कर तिजोरी या पैसे रखने वाली जगह में रख लें।

कार्यक्षेत्र में आ रही समस्याओं को दूर करने के उपाय
अगर आपको कार्यक्षेत्र में समस्या आ रही है तो आप आप रंगभरी एकादशी के दिन आवंले के पेड़ पर जल अर्पित करके इसकी मिट्टी माथे पर लगाएं। इससे आपके कार्यक्षेत्र में आ रही सारी समस्याएं दूर हो जाएंगीं।

पति-पत्नी के झगड़े दूर करने के उपाय
यदि व्यक्ति के दांपत्य जीवन में लगातार झगड़े हो रहे हैं या लड़ाई होती रहती है। तो कंडीशन में पति-पत्नी के बीच चल रहे झगड़ों को दूर करने के लिए आप आंवले के वृक्ष पर सात बार सूत का धागा लपेटने से समस्या दूर होती है। इसके बाद घी का दीपक जला कर तनाव दूर करने की प्रार्थना करें।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।