शरद पवार को हमने दी है 'गुरु दक्षिणा' एनसीपी का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) दे कर : छगन भुजबल
<p><em>महाराष्ट्र की राजनीति में आया एनसीपी में बगावत का किस्सा कई बड़े नाटकीय मोड़ लाने वाला साबित हुआ है। अजित पवार ने सिर्फ एनसीपी में दो फाड़ नहीं किए हैं बल्कि पूरी महाराष्ट्र राज्य की सियासी तस्वीर बदल कर रख दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि अजित पवार के एक फैसले ने शरद पवार की नींद उड़ाई है, दूसरी तरफ शिंदे गुट में खलबली मच गई है और बीजेपी भी अपनी आगे की रणनीति पर काम करने लगी है। यानी कि भतीजे पवार के एक फैसले ने हर जगह अपना प्रभाव छोड़ा है।</em></p>
अभी मै ही अध्यक्ष : शरद पवार
एनसीपी में अजीत पवार की बगावत अब चाचा भतीजा की आर-पार की लड़ाई के रूप में सामने आ गई है। एक तरफ अजित पवार ने चाचा शरद पवार को हटाकर खुद को अध्यक्ष घोषित कर दिया है तो वहीं शरद पवार का कहना है कि अभी वही पार्टी के अध्यक्ष हैं। आज शरद पवार ने दिल्ली में अहम बैठक की है जिसे अजित पवार ने अवैध बताया है।
चाचा की बैठक को गैरकानूनी बता डाला भतीजे ने
वहीं दूसरी तरफ अजित पवार की तरफ से जारी बयान में कहा गया,'शरद पवार ने जो बैठक बुलाई है, वह गैरकानूनी है। एनसीपी के प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद ECI के अधिकार क्षेत्र में है इसलिए पार्टी के अंदर किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है। बैठक में लिया गया फैसला मानने के लिए कानूनी तौर पर कोई भी बाध्य नहीं है।
हमने उन्हें 'गुरु दक्षिणा' दी है: भुजबल
अजित पवार खेमे के नेता एवं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि हमने महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने का फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया है। हमने शरद पवार को 'गुरु दक्षिणा' दी है। हमने उनके भतीजे को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया। हम पूरी पार्टी को सत्ता में लाए हैं। यदि एनसीपी प्रमुख शरद पवार का राजनीति में 57-58 साल का लंबा करियर है, तो मैंने भी उसी क्षेत्र में 56 वर्ष बिताए हैं। हमने ऐसे फैसला नहीं लिया कि एक दिन सुबह उठे और सरकार में शामिल हो गए।
ये हुआ है अब तक
एनसीपी नेता अजित पवार 2 जुलाई को चाचा शरद पवार से बगावत कर महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। उनके साथ एनसीपी के 8 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। अजित पवार गुट लगातार दावा कर रहा है कि उनके पास 40 विधायकों का समर्थन है। कल यानी 5 जुलाई को अजित ने शक्ति प्रदर्शन किया था। हालांकि इस मीटिंग में 31 विधायकों ने ही उन्हें समर्थन दिया था।
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