क्या है ये ' राइट टू हेल्थ बिल ' (Right To Health Bill) , क्यों डॉक्टर्स कर रहे हैं इसका इतना विरोध..! जानिए इसके सभी पहलुओं की पूरी जानकारी

<p><em>राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए 21 मार्च 2023 को विधानसभा में Right To Health Bill ध्वनि मत से पारित कर दिया गया है। इस बिल के मुताबिक आपातकालीन स्थितियों राज्य में प्राइवेट अस्पतालों&nbsp;को मरीजों का इलाज निशुल्क करना होगा। उसके लिए उन्हें एक भी पैसा नहीं लेना होगा। विशेषरूप से इस प्रावधान के कारण इस बिल का प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टरों&nbsp;द्वारा विरोध किया गया है और इसके लिए वे धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।&nbsp;इसी संदर्भ में हम आपको इस विशेष लेख&nbsp;में राजस्थान के Right To Health Bill से संबंधित सारी बातों के बारे में आपको विस्तार पूर्वक जानकारी दें रहे हैं..जैसे- क्या है Right To Health Bill Rajasthan ; Right To Health Bill को लेकर क्यों हो रहा है इसका विरोध? &nbsp;Right To Health Bill &nbsp;से जनता को क्या फायदे मिलने वाले हैं और साथ ही विरोध करने वाले चिकित्सकों का पक्ष भी, हम बताएंगे।&nbsp;राइट टू हेल्थ बिल की पूरी जानकारी देता यह आलेख..</em></p>

क्या है ये ' राइट टू हेल्थ बिल ' (Right To Health Bill) , क्यों डॉक्टर्स कर रहे हैं इसका इतना विरोध..! जानिए इसके सभी पहलुओं की पूरी जानकारी
28-03-2023 - 08:25 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

हालांकि बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर प्रमुख विपक्ष दल भारतीय जनता पार्टी और निजी अस्पतालों द्वारा विरोध किया जा रहा है। लेकिन, सरकार राइट टू हेल्थ बिल को राज्य के आम नागरिकों के लिए काफी लाभदायक बता रही है। ऐसे में लोगों के मन में जानने की उत्सुकता बढ़ रही है किआखिर में राइट टू हेल्थ बिल क्या है?

क्या है राइट टू हेल्थ बिल?

राजस्थान सरकार ने राइट टू हेल्थ राज्य विधानसभा से पारित करवा लिया है और इस बिल के लागू होते ही राजस्थान मरीजों को स्वास्थ्य का अधिकार देने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। उपचार का कानूनी अधिकार मिलने से जनता को ये फायदे होंगे..

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• निजी अस्पताल में भी मरीजों को आपातकालीन स्थिति में निशुल्क इलाज मिल सकेगा।
राइट टू हेल्थ में आतंकवाद नेचुरल बायोलॉजिकल खराबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया, जहरीले पदार्थ, केमिकल अटैक, वायरस, परमाणु हमला, दुर्घटना, आबादी की बड़ी तादाद में मौत, गैसों का फैलना और जोखिम दुर्घटनाएं शामिल की गई है जिससे राज्य में होने वाले नुकसान भी कवर हो सकेंगे।
• बिल के नियमो के तहत आउट डोर पेशेंट्स (OPD), इनडोर पेशेंट्स, डॉक्टर को दिखाना और परामर्श, दवाइयां, डायग्नोसिस, इमरजेंसी ट्रांसपोर्टेशन यानी एम्बुलेंस सुविधा, प्रोसीजर और सर्विसेज के साथ इमरजेंसी ट्रीटमेंट मिलेगा। 
• प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति का हेल्थ इंश्योरेंस सरकार अपने स्तर पर करवाएगी। 
• अब डॉक्टरों द्वारा दिए जा रहे इलाज की जानकारी मरीज और उसके परिजन ले सकेंगे। 
• फीस या चार्ज के एडवांस पेमेंट के बिना इमरजेंसी कंडीशन के दौरान बिना देरी किए प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर जरूरी इमरजेंसी ट्रीटमेंट फैसिलिटी और इंटेंसिव केयर, इमरजेंसी डिलेवरी और ट्रीटमेंट देंगे।
• कोई मेडिको-लीगल मामला है, तो हेल्थ केयर प्रोवाइ़डर केवल पुलिस की एनओसी या पुलिस रिपोर्ट मिलने के आधार पर इलाज में देरी नहीं करेगा। 
• सुरक्षित खाना देने, पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था, हाइजीन के लिए सरकारी डिपार्टमेंट के बीच आपसी तालमेल रखा जाएगा।
• इलाज के दौरान यदि मरीज की अस्पताल में मौत हो जाती है और अस्पताल में इलाज का भुगतान नहीं होता है तब भी डेड बॉडी को अस्पताल रोक नहीं सकेंगे। 
• किसी मरीज को गंभीर स्थिति में दूसरे हॉस्पिटल में रैफर करने की जिम्मेदारी अस्पताल की होगी। 
• सर्जरी, कीमोथैरेपी की पहले से ही सूचना देकर मरीज या उसके परिजनों से सहमति लेनी होगी। 
• किसी मेल वर्कर की ओर से महिला पेशेंट के फिजिकल टेस्ट के दौरान अन्य महिला की उपस्थिति जरूरी होगी। 
• उपलब्ध ऑप्शनल ट्रीटमेंट मेथड का सलेक्शन मरीज कर सकेगा। 
• हर तरह की सर्विस और फैसिलिटी की रेट और टैक्स के बारे में सूचना पाने का हक मिलेगा। 
• निजी अस्पतालों को भी मरीज की बीमारी को गोपनीय रखना होगा। 
• इसके अलावा इंश्योरेंस स्कीम में चयनित अस्पतालों में निशुल्क उपचार का अधिकार होगा। 
• रोड एक्सीडेंट्स में फ्री ट्रांसपोर्टेशन, फ्री ट्रीटमेंट और फ्री इंश्योरेंस कवर इस्तेमाल होगा। 
• इस बिल में मरीज और उनके परिजनों को लेकर भी कुछ कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं। स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के साथ मरीज या उसके परिजन दुर्व्यवहार नहीं करेंगे। साथ ही अप्राकृतिक मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम करने की अनुमति देनी होगी। 

किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर दोषी पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना

Right To Health Bill के तहत यदि किसी डॉक्टर या मरीज़  द्वारा किसी प्रावधान या नियम का उल्लंघन किया जाता है तो उन्हें ऐसा करने पर 25000 रुपए तक का जुर्माना देना पड़ेगा। पहली बार किसी प्रावधान या नियम का उल्लंघन करने पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना देना होगा इसके अलावा यदि बाद में निर्धारित किए गए किसी नियम का उल्लंघन करने पर 25000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

RTH  का क्यों हो रहा है इतना विरोध 

राजस्थान के डॉक्टरों ने इस बिल को "राइट टू हेल्थ" की जगह "राइट टू किल" बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल के आने के बाद वे मरीजों का फ्री में इलाज करने को मजबूर होंगे। 

-डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल के तहत आपात स्थिति में निजी अस्पतालों को भी मुफ्त में इलाज करना है। लेकिन, आपात स्थिति क्या हो सकती है, इसे तो परिभाषित ही नहीं किया गया है। इस कारण हम किसी भी मरीज का फ्री में इलाज करने को बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति में हम अपने अस्पताल के खर्चे कैसे उठाएंगे। 

- इस बिल में गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज को रेफर करने की स्थिति में एंबुलेंस की व्यवस्था करना अनिवार्य है। अब इस एंबुलेंस का खर्च कौन वहन करेगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। 

- इस बिल में राज्य और जिला स्तर पर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज और मरीजों के अधिकारों के लिए प्राधिकरण का गठन किया जाना है। डॉक्टरों की मांग है कि इस प्राधिकरण में विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि वे पूरी प्रक्रिया को समझ सकें। अगर ऐसा नहीं होगा, तो चिकित्सकों को ब्लैकमेल किया जायेगा। 

-इस बिल के अनुसार निजी अस्पतालों को भी सरकारी योजना के अनुसार सभी बीमारियों का इलाज नि:शुल्क करने के लिए प्राइवेट अस्पतालों को बाध्य क्यों किया जा रहा है ? योजनाओं के पैकेज अस्पताल में इलाज और सुविधाओं के खर्च के मुताबिक नहीं हैं। 

- दुर्घटनाओं के दौरान घायल मरीज को अस्पताल पहुंचाने वालों के लिए तो पांच हजार रुपये प्रोत्साहन का प्रावधान है। लेकिन,अस्पताल वालों को फ्री इलाज करना है.. ऐसा कैसे संभव है?

- दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीजों को ब्रेन हैमरेज या हार्ट अटैक भी हो सकता है। ऐसे मरीजों का सभी निजी अस्पतालों में तो इलाज भी संभव नहीं..इस हालत में क्या होगा? 
-इसके अलावा Right To Health Bill को लेकर आंदोलन कर रहे चिकित्सक समुदाय का कहना है कि इससे उन पर नौकरशाही का बोझ बढ़ेगा। 

बिल में डॉक्टरों के पक्ष में कुछ भी स्पष्ट नहीं है बल्कि इस बिल के तहत प्राइवेट अस्पताल किसी भी इमरजेंसी में इलाज के लिए बाध्य हो जाएंगे।
 

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