नेपाल की महिलाओं ने जयपुर में सामूहिक रूप से मनाई हरितालिका तीज
नेपाली महिलाओं ने जयपुर में मूल प्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज नगर समिति जयपुर उत्तर व दक्षिण के तत्वावधान में हरितालिका तीज मनाई। हरितालिका तीज को नेपाल में महिलाओं का प्रमुख त्यौहार माना जाता है। यह त्यौहार कृष्ण जन्माष्टमी के 11वें दिन मनाया जाता है। इस दिन नेपाल में महिलाओं की तरफ से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम किया जाता है। जयपुर में यह त्योहार मंगलवार 30 अगस्त को मनाया गया।
उल्लेखनीय है कि कोरोना के चलते पिछले दो सालों से इस तरह के आयोजन नहीं कर पा रहे थे। लेकिन अब स्थिति सामान्य होने के कारण उसी परम्परा को कायम रखते हुए इस साल जयपुर में नेपाली महिलाओं ने भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के द्वारा विदेश में रहकर भी अपने देश की संस्कृति को जीवित रखने का संदेश दिया। राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाईड भवन, रामनिवास बाग, जयपुर में सम्पन्न हुए उक्त कार्यक्रम में पूरे जयपुर से हजारों की संख्या में नेपाली महिलाएं एकत्रित हुई।
जयपुर के विभिन्न इलाकों से नेपाल की भेष-भूसा में सजकर आई महिलाओं ने अपने अपने ग्रुप बनाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के माध्यम से अपनी कला और संस्कृति का सरक्षण, समाज में व्याप्त कुरीतियों का अन्त्य, देशभक्ति की भावना का विकास व नेपाली समाज को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का आहवान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मूल प्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज के श्री मोहन गिरी थे।
उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि आज के दिन भारत के करीब 300-350 स्थानों पर मूल प्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज के बैनर तले यह हरितालिका तीज मनाई जा रही है। गिरी के अनुसार भारत में रह रहे नेपाली समुदाय की विभिन्न समस्याओं को समाधान के लिए यह संगठन 42 सालों से कियाशील है। 1950 की सन्धि के प्रावधानों तहत नेपाल के नागरिक भारत में और भारत के नागरिक नेपाल में जाकर बिना किसी रोकटोक के अपनी नौकरी पेशा, व्यापार व्यवसाय आदि कर सकते हैं। लेकिन, भारत में रह रहे नेपाली नागरिक उक्त संधि द्वारा दी गई सुविधा व अधिकारों से वंचित है। यह 1950 के समझौते का उल्लंघन है।
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