महिला दिवस विशेष : महिलाएँ और उनके साथ बढ़ते साइबर अपराध- कैसे हो बचाव?
<p>एक महत्त्वपूर्ण मुद्दे की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहती हूँ- सोशल मीडिया पर महिलाओं की बढ़ती उन्मुक्त सक्रियता और साइबर अपराध। वर्तमान में महिलाएँ द्रुत गति से सोशल मीडिया के हर ट्रैक पर दौड़ लगा रही हैं। इससे उन्हें अपने विचार व्यक्त करने, जागरूकता बढ़ाने, और समाज में योगदान करने का मौका मिल रहा है। लेकिन वर्चस्व उन महिलाओं ने कायम कर लिया है, जो रूमानी गीतों पर कामोत्तेजक नृत्य या सेंसुअल लिपसिंग करके रोज अंधाधुंध सब्सक्राइबर्स गिन रही हैं। शार्ट ड्रेसेस में अंग प्रदर्शन करके, उनको परम सुंदरी का ताज भी मिल रहा है। इसी के साथ मिल रहे हैं अभद्र टिप्पणियों के तमगे, और घट रही हैं वीभत्स घटनाएँ।</p>
सोशल मीडिया पर उत्तेजक वीडियो डालने वाली सौंदर्य प्रदर्शी महिलाओं के अथक प्रयासों से कई विसंगतियों का जन्म हुआ है। इसे नारी स्वतंत्रता, सशक्तिकरण कहें या स्तरहीन कुंठा, कुछ समझ नहीं आता। ऐसे वीडियो नैतिकता के प्रश्न उत्पन्न करते हैं और समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण को बदलते हैं। इससे समाज की अन्य बहू- बेटियों पर मोबाइल प्रयोग नहीं करने के लिए अनावश्यक पारिवारिक और सामाजिक दबाव बढ़ता है, जिससे व्यक्तिगत जीवन पर नकारात्मक प्रभाव होता है।
दुर्बल चरित्र के पुरुष ऐसी महिलाओं के बहाने सभी महिलाओं को तंग करके चान्स लेते हैं, इससे ऑनलाइन सुरक्षा समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। अश्लील-आपत्तिजनक टिप्पणियों, धमकियों अर्थात साइबर बुलींग का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। ऐसे वीडियो से महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाइ किया जा सकता है, जिससे उन्हें नीचा दिखाया जा सकता है।
खूबसूरती के कद्रदान एडिटिंग के माध्यम से अवांछित तस्वीरों या वीडियोज़ को बनाकर, ऑनलाइन शेयरिंग का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग करते हैं। इस काले जाल में कच्ची उम्र की लड़कियाँ आराम से फँस जाती हैं। इसके बाद उन्हें वास्तविक मीटिंग करके अवांछित संबंधों के लिए मजबूर किया जाता है।
ऑनलाइन पहचान को हैक करके, उसका उपयोग कर महिलाओं को आसानी से अपने चंगुल में फँसा लिया जाता है। बोल्ड एन्ड ब्यूटीफुल कहलाने की चाह व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी लीक करवाती है , जिसका ख़मियाज़ा अपनी किस्मत के अनुसार भुगतना पड़ता है। 'कुछ नया करने की चाह' इस प्रकार से आखिरकार अंधेरी गुफ़ा में भटकने को मजबूर कर देती है।
किसी भी समाज का स्तर वहाँ की महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ अनैतिक धन्धे में लिप्त महिलाओं के शारीरिक व्यक्तित्व से प्रभावित होकर, सभ्य समाज की महिलाओं को भी उसी प्रकार प्रदर्शनी लगाने का साहस मिलता है। पहले सभ्रांत घरानों की बहू-बेटियाँ का इस तरह से मनोरंजन करके पैसा कमाना अच्छा नहीं समझा जाता था, परंतु अब तो नारी सशक्तिकरण के मरहम द्वारा बीते समय का दर्द दूर किया जा रहा है।
अपने घर की महिलाओं को स्पष्टतया ऑनलाइन संसार की कुण्डली समझाने की आज बहुत आवश्यकता है। कई केवल चकाचौंध में अन्धी होती हैं, उनकी आँखों का इलाज बेहद आवश्यक है। सोशल मीडिया पर पदार्पण से पूर्व उन्हें इसके काले चेहरे से वाकिफ़ कराना चाहिए। अनावश्यक अंग प्रदर्शन एवं कामोत्तेजक अदाएँ दिखाती वीडियो बनाने पर बिल्कुल प्रतिबंध लगाएँ और अपराधों से बचाव के लिए सजग रहने, ऑनलाइन सुरक्षा के उपायों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करें।
सभी महिलाओं को जानकारी होना चाहिए कि अपने सोशल मीडिया खातों की गोपनीय सेटिंग्स को सुरक्षित रखें और केवल जिन लोगों को आप जानती हैं, उन्हें ही आपकी जानकारी को एक्सेस करने की अनुमति दें। मजबूत और अनूठा पासवर्ड चुनें, और नियमित अंतरालों पर उसे बदलें।
अपनी प्रोफाइल पर अनुचित तरीके से टिप्पणियाँ करने वालों असामाजिक तत्वों को ब्लॉक करें और अनफॉलो करें। व्यक्तिगत जानकारी को साझा नहीं करें और न ही व्यक्तिगत चैटिंग करें।
सोशल मीडिया का सीमित समय तक ही प्रयोग करें, ताकि यह व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित न करे।
उपयोगकर्ता महिला को अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए और आवश्यकता होने पर अभद्रता की शिकायत प्राधिकृत अथौरिटीज़ को सूचित करना चाहिए। सोशल मीडिया पर लिंकों और संदेशों को बिना जानकारी नहीं खोलें, ताकि आप ऑनलाइन खतरों से बच सकें।
ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दों पर जागरूक रहना चाहिए और साइबर सेल्फ डिफेंस को सीखने के लिए उपयुक्त स्रोतों का अध्ययन करना चाहिए। यदि साइबर बुलींग का शिकार होते हैं, तो तुरंत ऑनलाइन सुरक्षा अधिकारी या साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट से मदद लें। घटना की सभी संबंधित जानकारी जैसे कि स्क्रीनशॉट्स, लिंक्स, या अन्य आवश्यक बातें एकत्र रखें। अगर सहायता की आवश्यकता हो, तो स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर भी रिपोर्ट की जा सकती है।
ये सावधानियाँ महिलाओं को सोशल मीडिया का सुरक्षित और सकारात्मक रूप से उपयोग करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, सुरक्षित रहने के लिए अपनी निजी जानकारी को सावधानीपूर्वक संरक्षित रखना चाहिए और ऑनलाइन दुर्भावना का सामना करने के लिए कमर कस लेनी चाहिए। महिलाओं का सोशल मीडिया पर सतर्क रहना और आपत्तिजनक प्रदर्शन से दूर रहकर उपयोग करना महत्वपूर्ण है, ताकि सुरक्षा और सम्मान बुलन्दियों पर रहे.
लेखिका के बारे में :
"लेखिका दीप्ति सक्सेना विज्ञान शिक्षिका होने के अलावा एक कवियत्री,सम्पादिका तथा काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान की संस्थापिका हैं।विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों से सुसज्जित लेखिका बाल साहित्य के अलावा हिन्दी भाषा के प्रचार एवं प्रसार में भी अपना अनवरत योगदान दे रही हैं। "
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