‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 भारतीय विमान गिराए’: शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा, ट्रंप को बताया ‘शांति का दूत’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया कि उनके देश ने इस वर्ष मई माह में सात भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया। महासभा को संबोधित करते हुए पाक पीएम ने कहा कि “हमने युद्ध जीता है, और अब शांति जीतना चाहते हैं..
न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया कि उनके देश ने इस वर्ष मई माह में सात भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया। महासभा को संबोधित करते हुए पाक पीएम ने कहा कि “हमने युद्ध जीता है, और अब शांति जीतना चाहते हैं।”
शरीफ़ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की और उन्हें “शांति का दूत” बताते हुए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में ट्रंप की भूमिका ऐतिहासिक रही।
शरीफ़ ने कहा, “पाकिस्तान मज़बूत स्थिति में होने के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप के साहसी और सक्रिय नेतृत्व से करवाए गए युद्धविराम पर सहमत हुआ। हम उनकी और उनकी टीम की सराहना करते हैं, जिन्होंने युद्धविराम सुनिश्चित करने में सक्रिय योगदान दिया। यदि ट्रंप का यह अद्भुत प्रयास न होता, तो आज कौन यह बताने के लिए जीवित होता कि क्या हुआ था? इसी कारण, क्षेत्र में शांति के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है। मेरा मानना है कि शांति से प्रेम करने वाले इस सच्चे ‘मैन ऑफ पीस’ के लिए हम इतना तो कर ही सकते हैं।”
हालाँकि शरीफ़ के ये दावे भारत की उस स्थिति से मेल नहीं खाते, जिसमें भारत ने स्पष्ट किया है कि युद्धविराम का समझौता दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच हुआ था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।
पाक प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि के निलंबन का मुद्दा भी उठाया, जिसे भारत ने इस वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के बाद स्थगित कर दिया था। यह भारत की ओर से पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की गतिविधियों के जवाब में उठाया गया कदम था।
ज्ञात हो कि सिंधु जल संधि सितंबर 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस संधि के तहत तीन पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज का नियंत्रण भारत को मिला था, जबकि तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया था। यह समझौता अब तक दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव के बावजूद लागू रहा है, हालाँकि भारत में इस संधि को अक्सर अनुचित करार दिया जाता रहा है।
शरीफ़ ने कहा, “भारत द्वारा एकतरफ़ा और अवैध तरीके से सिंधु जल संधि को निलंबित करना, संधि की मूल शर्तों और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों दोनों का उल्लंघन है। पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि अपनी जनता के इन जल संसाधनों पर अविच्छेद्य अधिकार की रक्षा हम हर हाल में करेंगे। हमारे लिए इस संधि का उल्लंघन युद्ध की कार्यवाही के समान है।”
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