‘3 चुनाव हारने के बाद बदल गई नैतिकता’: अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, जेल में बंद पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नैतिकता पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या तीन लगातार चुनाव हारने के बाद उनका रुख बदल गया..

‘3 चुनाव हारने के बाद बदल गई नैतिकता’: अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, जेल में बंद पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर बयान
26-08-2025 - 10:39 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नैतिकता पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या तीन लगातार चुनाव हारने के बाद उनका रुख बदल गया है।

शाह ने 2013 की एक घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस समय राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव के हित में लाए गए अध्यादेश को फाड़ दिया था, लेकिन अब वही राहुल गांधी ‘क्रिमिनल नेता’ बिल का विरोध कर रहे हैं।

अमित शाह ने कहा, राहुल जी ने वह अध्यादेश क्यों फाड़ा था, जिसे मनमोहन सिंह जी लालू जी को बचाने के लिए लाए थे? अगर उस दिन नैतिकता थी, तो अब क्या हुआ? क्या सिर्फ इसलिए कि आप तीन चुनाव हार गए? नैतिकता का पैमाना चुनाव जीतने-हारने से जुड़ा नहीं होता। यह तो सूरज और चाँद की तरह स्थिर होना चाहिए।”

पृष्ठभूमि: 2013 का अध्यादेश

यह अध्यादेश दोषी ठहराए गए सांसदों-विधायकों को तीन महीने की राहत देता था ताकि वे अपनी सीट बनाए रख सकें। यह कदम लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले में दोषी ठहराए जाने के बाद उठाया गया था और यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावहीन कर देता। बाद में इसे वापस ले लिया गया।

130वां संविधान संशोधन विधेयक 2025

अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को, अगर वह लगातार 30 दिन तक जेल में बंद रहता है, पद से हटाने का प्रावधान है।

शाह ने सवाल उठाया, क्या यह उचित है कि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल से सरकार चलाए? आज देश में एनडीए के मुख्यमंत्री ज़्यादा हैं, पीएम भी एनडीए से हैं। इसलिए यह बिल केवल विपक्ष पर नहीं बल्कि हमारे नेताओं पर भी लागू होगा। अगर केस फर्जी है, तो हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट ज़मानत देने के लिए बैठे हैं। अगर ज़मानत नहीं मिली, तो पद छोड़ना होगा।”

उन्होंने कहा कि क्या यह सही होगा कि अगर पीएम या सीएम जेल चले जाएँ तो वहीं से सरकार चलाएँ? क्या देश में यह धारणा है कि वही व्यक्ति न हो तो देश नहीं चलेगा? आपकी पार्टी के पास बहुमत है, तो आपकी ही पार्टी का कोई और नेता सरकार चला सकता है।”

शाह का अपना उदाहरण

अमित शाह ने सोहराबुद्दीन शेख फर्ज़ी मुठभेड़ मामले का ज़िक्र करते हुए कहा, जैसे ही मुझे सीबीआई का समन मिला, मैंने अगले ही दिन इस्तीफ़ा दे दिया। बाद में मुझे गिरफ्तार किया गया। केस चला और बाद में अदालत ने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला था और मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ। लेकिन, ज़मानत मिलने के बाद भी मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया। जब तक सभी आरोप पूरी तरह ख़ारिज नहीं हुए, मैंने शपथ नहीं ली। तो मुझे नैतिकता का पाठ कौन पढ़ा रहा है?”

विपक्ष पर हमला

शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे “जेल से सरकार चलाना” चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी विपक्ष ने प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिश की थी और आज भी वे चाहते हैं कि अगर कोई इंडिया गठबंधन का नेता जेल चला जाए, तो वहीं से सरकार बना लें।

शाह ने कहा,क्या जेल को सीएम हाउस, पीएम हाउस बना दिया जाएगा और वहाँ से डीजीपी, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव और गृह सचिव आदेश लेंगे? क्या इस तरह देश चल सकता है?”

संसद में पेश बिल

अमित शाह ने मानसून सत्र में तीन बिल पेश किए –

  1. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025
  2. केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025
  3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन विधेयक

सभी बिलों को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया।

विशेष तौर पर 130वां संशोधन विधेयक कहता है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री लगातार 30 दिन तक जेल में बंद रहता है, तो 31वें दिन पद अपने आप खाली हो जाएगा, यदि नेता ने इस्तीफ़ा नहीं दिया। हालाँकि, रिहा होने के बाद दोबारा उसी पद पर नियुक्ति का प्रावधान रखा गया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।