ऑटोचालक को मिला एक दिन में इंसाफ: उपभोक्ता मंच में पहली बार फास्ट ट्रैक
<p><em><strong>जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग-तृतीय ने एक मिसाल कायम करते हुए ऑटो चालक व फाइनेंस कंपनी के बीच विवाद मामले में नोटिस तामील होने के एक दिन में ही फैसला देकर ऑटो मालिक को न्याय दिलवाया है।</strong></em></p>
आमतौर पर न्यायिक व्यवस्था में धारणा है कि न्याय मिलना आसान नहीं है और इसमें देरी होती है। लेकिन समय पर न्याय नहीं मिलना भी अन्याय ही है। ऐसे में जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग-तृतीय ने एक मिसाल कायम करते हुए ऑटो चालक व फाइनेंस कंपनी के बीच विवाद मामले में नोटिस तामील होने के एक दिन में ही फैसला देकर ऑटो मालिक को न्याय दिलवाया है।
आयोग के अध्यक्ष देवेन्द्र मोहन माथुर व सदस्य सीमा शर्मा ने परिवादी चालक व फाइनेंस कंपनी के बीच आपसी सहमति से मामले का निपटारा करवाया और उपभोक्ता कानून के उद्देश्यों को सार्थक किया। इस मामले में जहां एक दिन में ही नोटिस की तामील करवाई गई। वहीं, फाइनेंस कंपनी को भी मामले का जल्द निस्तारण करने के लिए प्रोत्साहित किया।
यह है मामला
परिवादी राजेश कुमार ने एक निजी फाइनेंस कंपनी से ऑटो रिक्शे पर लोन लिया था। लोन के 4000 रुपए नहीं चुकाने पर फाइनेंस कंपनी के बाहुबलियों ने ऑटो रिक्शा को परिवादी को बिना कोई नोटिस दिए जबरन उठा लिया। जिस पर परिवादी ने 5 मई 2023 को जिला उपभोक्ता आयोग-तृतीय में परिवाद दायर अंतरिम स्टे मांगा। आयोग ने 8 मई को स्पीड पोस्ट व ईमेल के जरिए विपक्षी कंपनी को नोटिस की तामील करवाई व 9 मई को सुनवाई तय की।
दोनों पक्षों में समझाइश
सुनवाई के दौरान आयोग के सामने आया कि परिवादी पर केवल चार हजार रुपए का ही लोन बाकी है और यह राशि नहीं देने पर विपक्षी ने जबरन उसका ऑटो उठाया है। दोनों पक्षों में समझाइश की। परिवादी ने आयोग में ही कंपनी के बकाया 4 हजार रुपए दे दिए और ऑटो लौटाने व लोन की एनओसी जारी करने के लिए कहा। आयोग ने 10 मई को मामला निस्तारित कर दिया। जयपुर की जिला उपभोक्ता आयोग तृतीय सहित उपभोक्ता आयोग प्रथम व द्वितीय ने भी 2 महीने के दौरान 250 से ज्यादा केसों में फैसले किए हैं। इनमें से जिला उपभोक्ता आयोग तृतीय ने 145 केस में फैसले दिए हैं।
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