1,700 साल पुरानी शिव-शिवा की मूर्ति बिहार में मिली, ग्रामीणों ने म्यूज़ियम को सौंपने से किया इनकार

बिहार के जमुई ज़िले के मंजोश गांव में खुदाई के दौरान हाल ही में एक दुर्लभ मूर्ति मिली है, जो लगभग 1,700 से 1,800 साल पुरानी मानी जा रही है। यह मूर्ति हिंदू देवी-देवताओं शिव और पार्वती की संयुक्त रूप यानी उमा-महेश्वर के रूप में है..

1,700 साल पुरानी शिव-शिवा की मूर्ति बिहार में मिली, ग्रामीणों ने म्यूज़ियम को सौंपने से किया इनकार
28-05-2025 - 05:02 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

पटना। बिहार के जमुई ज़िले के मंजोश गांव में खुदाई के दौरान हाल ही में एक दुर्लभ मूर्ति मिली है, जो लगभग 1,700 से 1,800 साल पुरानी मानी जा रही है। यह मूर्ति हिंदू देवी-देवताओं शिव और पार्वती की संयुक्त रूप यानी उमा-महेश्वर के रूप में है, और इसे पाल वंश के प्रारंभिक काल से संबंधित माना जा रहा है। इस खोज ने ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच खलबली मचा दी है।

मिट्टी के नीचे छुपा था चौंकाने वाला रहस्य

खोज उस समय हुई जब गांव के कुछ लोग खैरा टोला के कोलहुआ पोखर के पास खुदाई कर रहे थे। खुदाई के दौरान अचानक ज़मीन के नीचे से छन-छन की आवाज़ सुनाई दी। जब उन्होंने और गहराई से खोदा तो एक सुंदर, प्राचीन मूर्ति दिखाई दी जिसे देखकर सभी अचंभित रह गए। मूर्ति की खबर तेजी से फैल गई और वहां भारी भीड़ जमा हो गई।

भक्ति बनाम संरक्षण

गहरी आस्था और श्रद्धा से ओत-प्रोत ग्रामीणों ने उस मूर्ति को पास के एक मंदिर के निकट स्थापित कर उसकी पूजा शुरू कर दी। जब यह बात प्रशासन को पता चली, तो अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), अंचलाधिकारी (CO) और स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर को म्यूज़ियम को सौंप दें, ताकि इसका वैज्ञानिक रूप से संरक्षण किया जा सके।

हालांकि, ग्रामीणों ने मना कर दिया। उनका कहना था कि यह मूर्ति उनकी आस्था से जुड़ी है और इसे गांव में ही रहना चाहिए। इस बात को लेकर ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

विशेषज्ञों की पुष्टि

बिहार संग्रहालय के पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. रवि शंकर गुप्ता ने मूर्ति का निरीक्षण किया और इसे प्रारंभिक पाल वंश का बताया। उन्होंने कहा, "यह उमा-महेश्वर की मूर्ति हिंदू धार्मिक कला का एक अत्यंत दुर्लभ और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेष है।"

इस मूर्ति में भगवान शिव और देवी पार्वती को एक साथ नंदी (बैल) और सिंह पर बैठे हुए दर्शाया गया है, जो उनके दिव्य मिलन का प्रतीक है। शिव की जटाएं बेहद सुंदरता से उकेरी गई हैं, वहीं पार्वती के गहनों में हार, झुमके, पायल और कलात्मक रूप से सजी हुई केशरचना शामिल हैं। पार्वती ललितासन में बैठी हैं और बड़ी कोमलता से शिव की ओर देख रही हैं।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि ऐसी मूर्तियां अत्यंत दुर्लभ होती हैं और ये राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मानी जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि मंजोश गांव में पूर्व में भी ऐसी कई पुरातात्विक खोजें हो चुकी हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।