राजस्थान के आदिवासी गांव में धर्मांतरण के आरोप पर 11 गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-झारखंड के प्रचारक भी शामिल
उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र के कनुवाड़ा बिलखाई गांव में कथित जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बाद पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए कुछ धार्मिक प्रचारक भी..
उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र के कनुवाड़ा बिलखाई गांव में कथित जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बाद पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए कुछ धार्मिक प्रचारक भी शामिल हैं।
दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा की गई यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
दो दिन से चल रही थी प्रार्थना सभा
यह कार्रवाई उदयपुर जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित कनुवाड़ा बिलखाई गांव में की गई। गांव के एक निवासी ने पुलिस को शिकायत दी थी कि प्रार्थना सभा की आड़ में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 11 लोगों को हिरासत में लिया। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
लालच देकर धर्म बदलने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार गांव में पिछले दो दिनों से प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी। आरोप है कि इस सभा के माध्यम से ग्रामीणों को प्रलोभन और समझाइश देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसे भी धर्म बदलने के लिए आमंत्रित किया गया था और बदले में आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया था।
200 से अधिक लोग थे मौजूद
ऋषभदेव थाना प्रभारी हेमंत आहारी ने बताया कि गांव निवासी बाबूलाल के नेतृत्व में यह प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी, जिसमें आसपास के 20 से अधिक गांवों के लोगों को बुलाया गया था।
उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां 200 से अधिक लोग मौजूद थे। प्रारंभिक जांच में लोगों को हिंदू धर्म त्यागकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किए जाने की बात सामने आई।
पुलिस ने 11 लोगों को हिरासत में लेकर उनके दस्तावेजों और पूर्व गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।
मोबाइल फोन और नेटवर्क की जांच
उदयपुर के डीएसपी राजीव रहार ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनके मोबाइल फोन की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उनका नेटवर्क कितना बड़ा है और उन्होंने पहले किन-किन स्थानों पर धार्मिक सभाएं आयोजित की थीं। पूछताछ पूरी होने के बाद मामले के बारे में और जानकारी सामने आएगी।
आरोपों की सत्यता की जांच जारी
पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सभा का वास्तविक उद्देश्य क्या था और वहां मौजूद लोगों को किस प्रकार के संदेश या जानकारी दी जा रही थी।
राजस्थान में सख्त हुआ धर्मांतरण कानून
उदयपुर और आसपास के ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों में अतीत में भी कथित धोखाधड़ी और धर्मांतरण से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं, जिनके कारण कई बार पुलिस हस्तक्षेप और सामाजिक तनाव की स्थिति बनी।
हालांकि अब राजस्थान में Rajasthan Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Bill, 2025 के तहत धर्मांतरण पर कड़े नियम लागू हैं।
इस कानून के अनुसार:
- यदि धर्मांतरण को लेकर विवाद होता है, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी पर होती है कि धर्म परिवर्तन जबरन या अवैध तरीके से नहीं कराया गया।
- स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने की स्थिति में भी संबंधित व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला कलेक्टर (डीएम) को आवेदन देना आवश्यक है।
- कानून के सख्त प्रावधानों के कारण ऐसे मामलों में जमानत प्राप्त करना भी अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है।
जांच पूरी होने के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। अभी तक आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रार्थना सभा केवल धार्मिक आयोजन थी या वास्तव में धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
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