केंद्र और विपक्ष के बीच बहस के बीच संसद के शीतकालीन सत्र में 8 विधेयक पारित
संसद के अपेक्षाकृत छोटे शीतकालीन सत्र के दौरान कुल आठ विधेयक पारित किए गए। इस दौरान कई विधेयकों, चुनावी सुधारों और वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर हुई चर्चा के समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने..
नयी दिल्ली। संसद के अपेक्षाकृत छोटे शीतकालीन सत्र के दौरान कुल आठ विधेयक पारित किए गए। इस दौरान कई विधेयकों, चुनावी सुधारों और वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर हुई चर्चा के समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
मानसून सत्र के विपरीत—जिसमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) पर चर्चा की विपक्ष की मांग को लेकर लगभग रोज़ाना कार्यवाही स्थगित होती रही..शीतकालीन सत्र में सरकार और विपक्ष चुनावी सुधारों पर चर्चा कराने पर सहमत हो गए।
इस सहमति का नतीजा यह रहा कि सत्र अपेक्षाकृत उत्पादक रहा, हालांकि इसमें तीखे हस्तक्षेप और जोरदार बहसें भी हुईं। दोनों सदनों की कार्यक्षमता 100 प्रतिशत से अधिक रही। इस दौरान कई अहम विधेयक पारित किए गए। यह सत्र राज्यसभा के सभापति के रूप में सी. पी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हुआ पहला सत्र था।
विपक्षी दलों ने विकसित भारत–G RAM G विधेयक का कड़ा विरोध किया और मांग की कि इसे स्थायी समिति (Standing Committee) को भेजा जाए। मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेने वाले इस विधेयक के पारित होने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यवाही के दौरान “कागज़ फाड़ने” की घटना की संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी निंदा की।
दोनों सदनों में SHANTI विधेयक पर भी तीखी बहस देखने को मिली।
लोकसभा की उत्पादकता 110 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता 121 प्रतिशत दर्ज की गई।
शीतकालीन सत्र में वित्तीय एजेंडा प्रमुख रहा और कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए, जिनमें बीमा कानूनों में संशोधन, विनियोग विधेयक और हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस से संबंधित विधेयक शामिल हैं।
यह सत्र 1 दिसंबर को शुरू हुआ था और शुक्रवार को साइन डाई (अनिश्चितकाल के लिए) स्थगित कर दिया गया। सत्र के दौरान लोकसभा में 10 विधेयक पेश किए गए और संसद के उच्च सदन द्वारा आठ विधेयक पारित किए गए। कुल 15 बैठकों वाले इस सत्र में दोनों सदनों ने मिलकर आठ विधेयक पारित किए।
दोनों सदनों द्वारा पारित वित्तीय एवं संबंधित प्रमुख विधेयकों में शामिल हैं..
- सबका बीमा–सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025
- विनियोग (संख्या–4) विधेयक, 2025
- केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025
- मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025
इसके अलावा भारत को रूपांतरित करने के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत उपयोग और उन्नयन से संबंधित विधेयक, 2025 जिसे SHANTI विधेयक कहा जाता है, भी संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ। यह विधेयक परमाणु क्षेत्र को निजी संस्थाओं के लिए खोलने का प्रावधान करता है।
सबका बीमा–सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य भारतीय बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को मौजूदा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करना है।
सरकार के अनुसार, यह कदम दीर्घकालिक और स्थिर विदेशी पूंजी को आकर्षित करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने तथा देश में बीमा कवरेज और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को विस्तृत करने के लिए उठाया गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की पहली अनुपूरक मांगों पर चर्चा की गई और उनसे संबंधित विनियोग विधेयक दोनों सदनों से पारित किए गए।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 भी दोनों सदनों से पारित हुआ। इसका उद्देश्य जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की अवधि समाप्त होने के बाद तंबाकू और उससे संबंधित उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में संशोधन करना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किया गया प्रतिभूति बाजार संहिता (SMC) विधेयक, 2025 विभागीय स्थायी समिति को भेज दिया गया। इसका उद्देश्य भारत के प्रतिभूति बाजार ढांचे को आधुनिक बनाना है। यह विधेयक पूंजी बाजार से जुड़े तीन दशकों पुराने कानूनों को एकीकृत और प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव करता है।
प्रस्तावित संहिता के तहत..
- प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956
- सेबी अधिनियम, 1992
- डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996
को मिलाकर एक एकीकृत कानून बनाया जाएगा।
मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025, जिसे दोनों सदनों ने पारित किया, जीएसटी परिषद के आगे के निर्णयों को लागू करने से संबंधित है। इसमें मणिपुर में मौजूदा जीएसटी दरों को दो प्रमुख स्लैब—5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत—में समाहित करने की योजना शामिल है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए सवालों के जवाब में किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार वायु प्रदूषण पर चर्चा चाहती थी, लेकिन विकसित भारत–G RAM G विधेयक के पारित होने के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा किए गए हंगामे के कारण यह चर्चा नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि सरकार वायु प्रदूषण पर पूरे दिन की चर्चा के लिए तैयार थी। रिजिजू ने कहा, “हम प्रदूषण पर चर्चा चाहते थे। विपक्ष ने इसकी मांग भी की थी। लेकिन कांग्रेस ने हंगामा खड़ा कर दिया। यही एक अफसोस रह गया। हम प्रदूषण पर पूरे दिन की चर्चा के लिए तैयार थे। कांग्रेस पार्टी ने अन्य दलों को भड़काकर सदन के वेल में आकर अव्यवस्था और व्यवधान पैदा किया।”
विकसित भारत–G RAM G विधेयक को संसद ने शुक्रवार को पारित किया। यह विधेयक गुरुवार दोपहर लोकसभा से पारित हुआ, जबकि राज्यसभा ने आधी रात के बाद तक बैठकर इसे मंजूरी दी।
लोकसभा में वायु प्रदूषण पर चर्चा गुरुवार के एजेंडे में थी लेकिन विकसित भारत–G RAM G विधेयक, 2025 के पारित होते ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
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