आमिर खान बोले कि पहलगाम हमलावर मुसलमान नहीं हो सकते..‘धर्म पूछकर गोलियां चलाई गईं..’"

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने आखिरकार 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले पर अपनी प्रतिक्रिया की टाइमिंग को लेकर हो रही आलोचना का जवाब दिया है। इस हमले में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई..

आमिर खान बोले कि पहलगाम हमलावर मुसलमान नहीं हो सकते..‘धर्म पूछकर गोलियां चलाई गईं..’"
16-06-2025 - 08:12 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने आखिरकार 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले पर अपनी प्रतिक्रिया की टाइमिंग को लेकर हो रही आलोचना का जवाब दिया है। इस हमले में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस घटना पर फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य सदस्य पहले ही प्रतिक्रिया दे चुके थे, जबकि आमिर का आधिकारिक बयान लगभग एक सप्ताह बाद सामने आया। अब इंडिया टीवी को दिए एक स्पष्ट और भावनात्मक इंटरव्यू में आमिर ने देरी से प्रतिक्रिया देने के कारण और इस घटना के मानसिक प्रभाव के बारे में खुलकर बात की।

हमले को "क्रूर" और "कायराना" बताते हुए आमिर ने कहा, "यह आतंकी हमला बहुत ही क्रूर था। यह दर्शाता है कि आतंकवादी कितने कायर हैं जो हमारे देश में घुसकर आम लोगों पर गोलियां चला रहे हैं। आप या मैं भी वहाँ हो सकते थे। उन्होंने धर्म पूछकर गोलियां चलाईं। इसका क्या मतलब है?"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर तत्काल पोस्ट न करना उनकी संवेदनाओं की कमी नहीं थी। उन्होंने बताया, "मैं सोशल मीडिया पर नहीं हूँ। लोग वहाँ तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने घटना के कुछ दिन बाद एक कार्यक्रम में इस पर बात की थी।

आमिर ने कहा, "यह हमला सिर्फ हमारे देश पर ही नहीं, हमारी एकता पर भी था। और हमारे देश ने इसका माक़ूल जवाब पहले ही दे दिया है।"
उन्होंने ऑपरेशन सिन्दूर का हवाला दिया, जिसके तहत भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए थे।

जब उनसे पूछा गया कि क्या यह बयान उनकी आने वाली फिल्म "सितारे ज़मीन पर" के प्रमोशन के साथ जोड़कर दिया गया, तो आमिर ने शांत लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया दी:

"अगर मैं यह कहता हूँ कि हमारी सेना ने माक़ूल जवाब दिया, तो क्या मैं गलत कर रहा हूँ? मुझे उस समय अपनी फिल्म के बारे में सोचना चाहिए या सेना के बारे में? अगर मैं सिर्फ इसलिए चुप रहूं कि मेरी फिल्म रिलीज़ होने वाली है, तो यह ग़लत है। इसलिए मैंने खुलकर बोला।"

उन्होंने आगे कहा कि फिल्म का ट्रेलर उनके बयान के सिर्फ 12 घंटे बाद रिलीज़ हुआ, लेकिन यह एक संयोग था। उन्होंने कहा, "ट्रेलर तो पहले ही रिलीज़ होना था, लेकिन देश पर हमले के कारण मैंने उसे रद्द कर दिया। मैंने उस दिन 'अंदाज़ अपना अपना' की री-रिलीज़ का प्रीमियर भी रद्द कर दिया।"
बता दें, यह 1994 की लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म 25 अप्रैल को फिर से थिएटरों में रिलीज़ हुई थी।

आमिर ने स्वीकार किया कि यह घटना उन्हें अंदर तक झकझोर गई "जैसे हर भारतीय के दिल में दर्द और गुस्सा था, वैसे ही मेरे दिल में भी था। मैं इतना उदास था कि कई दिन तक घर से बाहर ही नहीं निकला।"

देशभक्ति के विषय पर बात करते हुए आमिर ने कहा कि उनके फिल्मों में देशप्रेम झलकता है। उन्होंने कहा, "मेरा देशप्रेम मेरे काम में दिखता है। 'रंग दे बसंती', 'लगान', 'सरफरोश' देख लीजिए। मुझे नहीं लगता कि किसी और अभिनेता ने इतनी देशभक्ति वाली फिल्में की हैं जितनी मैंने की हैं।"

उन्होंने वयोवृद्ध अभिनेता मनोज कुमार की एक तारीफ को याद करते हुए कहा, "मनोज जी ने मुझसे कहा था – 'अगर मेरी पीढ़ी के बाद कोई है जो देश के लिए कुछ कर रहा है, तो वह तुम हो।' उन्होंने मेरी फिल्में देखी थीं।"

पिछले कई वर्षों से ट्रोलिंग और सोशल मीडिया आलोचना — खासकर लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज़ से पहले — पर आमिर ने कहा कि वह इससे विचलित नहीं होते लेकिन आत्ममंथन जरूर करते हैं।

आमिर ने इस मौके पर आतंकवादियों द्वारा इस्लाम के नाम पर की जाने वाली हिंसा की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "कोई भी धर्म निर्दोषों की हत्या करने को नहीं कहता। मैं इन आतंकवादियों को मुसलमान नहीं मानता, क्योंकि इस्लाम में लिखा है कि किसी निर्दोष को मारना, किसी महिला या बच्चे पर हमला करना मना है। ये लोग जो कर रहे हैं, वो इस्लाम के खिलाफ है।"

विवादों और आलोचनाओं के बावजूद आमिर खान बॉलीवुड की उन कुछ आवाज़ों में से एक बने हुए हैं जो प्रतिक्रिया से ज़्यादा आत्मचिंतन को तरजीह देते हैं। उनके ये ताज़ा बयान एक बार फिर इस बात की याद दिलाते हैं कि आज के दौर में सेलिब्रिटीज़ को तत्काल गुस्से और सामाजिक निगरानी के बीच कितनी सावधानी से चलना पड़ता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।