परमार्थ निकेतन के आचार्य दीपक संस्कृत व संस्कारों के लिए किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित

मेवाड़ की धरती शौर्य एवं त्याग की भूमि होने के साथ-साथ संस्कृत भाषा के अभ्युदय की धरती भी रही है। महाराणा राजसिंह के शासनकाल में संस्कृत में रचित ग्रंथ राज-प्रशस्ति ने संस्कृत भाषा के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसी मेवाड़ धरा पर 6 अगस्त को संस्कृत दिवस अंतर्गत राज्य स्तरीय संस्कृत विद्वत्जनसम्मान समारोह आयोजित..

परमार्थ निकेतन के आचार्य दीपक संस्कृत व संस्कारों के लिए किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित
08-08-2025 - 04:02 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

उदयपुर। मेवाड़ की धरती शौर्य एवं त्याग की भूमि होने के साथ-साथ संस्कृत भाषा के अभ्युदय की धरती भी रही है। महाराणा राजसिंह के शासनकाल में संस्कृत में रचित ग्रंथ राज-प्रशस्ति ने संस्कृत भाषा के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसी मेवाड़ धरा पर 6 अगस्त को संस्कृत दिवस अंतर्गत राज्य स्तरीय संस्कृत विद्वत्जनसम्मान समारोह आयोजित किया गया।

सुखाड़िया रंगमंच सभागार में आयोजित इस सम्मान समारोह के अवसर पर संस्कृत व संस्कारों के लिये किये गए उत्कृष्ट कार्यों के लिये परमार्थ निकेतन के आचार्य दीपक शर्मा को विशिष्ठ संस्कृत सम्मान दिया गया। उदयपुर में आयोजित एक समारोह में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से आचार्य दीपक को यह सम्मान दिया।

सम्मान समारोह में राजस्थान के जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी अति विशिष्ट अतिथि, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन व उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उनके अलावा सारस्वत अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्व विद्यालय जयपुर के निदेशक प्रो वाईएस रमेश और संस्कृत विभाग आयुक्त प्रियंका जोधावत भी उपस्थित रहे।

जोधावत ने कहा कि प्रदेश सरकार ने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। वेद विद्यालयों की स्थापना हो या वैदिक गुरूकुल की अवधारणा को धरातल पर लाना हो.. राजस्थान सरकार ने नवाचारों के माध्यम से देवभाषा संस्कृत की प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि की है। झीलों की नगरी उदयपुर में राज्य स्तरीय आयोजन कर एक बार फिर सरकार ने संस्कृत के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शित किया है। इस आयोजन में संस्कृत शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के व्यापक दृष्टिकोण की महती भूमिका रही है। उन्होने ही जयपुर से बाहर इस आयोजन का विचार सामने रखा और पिछले वर्ष कोटा में सफल आयोजन के पश्चात इस वर्ष आयोजन का दायित्व मेवाड़ को सौंपा।

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