राबड़ी देवी से सरकारी बंगला खाली कराने के विवाद पर गरमाई बिहार की राजनीति.. सम्राट चौधरी बोले कि सरकारी आवास कोई पुश्तैनी संपत्ति नहीं
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर विवाद मंगलवार को और तेज हो गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी बंगले को किसी की "पुश्तैनी संपत्ति" या निजी जागीर नहीं माना जा सकता..
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर विवाद मंगलवार को और तेज हो गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी बंगले को किसी की "पुश्तैनी संपत्ति" या निजी जागीर नहीं माना जा सकता।
"मुख्यमंत्री आवास जनता का है, किसी परिवार की जागीर नहीं"
शेखपुरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि पद छोड़ने के बाद सार्वजनिक प्रतिनिधियों को सरकारी नियमों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री का आवास जनता का है। इसे किसी की निजी जागीर या पुश्तैनी संपत्ति नहीं समझा जा सकता। यह कोई राजशाही नहीं है।"
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बिहार सरकार ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया है। यह आवास अब राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है।
"मैंने कभी सरकारी घर को अपना नहीं माना"
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कई सरकारी आवासों का उपयोग किया है, लेकिन कभी उन्हें अपनी निजी संपत्ति नहीं समझा।
उन्होंने कहा, "मैं मुख्यमंत्री, मंत्री और गृह मंत्री रहा हूं लेकिन मैंने कभी सरकारी आवास को अपना घर नहीं माना। मैंने कई बार आवास बदले हैं और उनका उपयोग केवल सरकारी कार्यों के लिए किया है।"
उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने भी जब-जब पद छोड़ा, तब नियमों के अनुसार सरकारी आवास खाली किया और कभी नोटिस का इंतजार नहीं किया।
क्या है 10 सर्कुलर रोड विवाद?
विवाद 10 सर्कुलर रोड को लेकर है, जहां वर्तमान में राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्य रहते हैं।
राज्य के भवन निर्माण विभाग ने 29 मई को नोटिस जारी कर राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर आवास खाली करने का निर्देश दिया था।
सरकार का कहना है कि..
- यह बंगला अब नंद किशोर राम को आवंटित किया जा चुका है।
- राबड़ी देवी को वैकल्पिक सरकारी आवास के रूप में 39 हार्डिंग रोड आवंटित किया गया है।
- प्रशासन पहले भी इस संबंध में नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन अब तक आवास खाली नहीं किया गया।
राबड़ी देवी का साफ इनकार
विवाद तब और बढ़ गया जब राबड़ी देवी ने सार्वजनिक रूप से सरकार के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "वे जगह खाली कराने के लिए बल बुला सकते हैं, लेकिन मैं यह आवास खाली नहीं करूंगी।" उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी RJD के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
तेज प्रताप यादव भी कूदे विवाद में
इस मुद्दे पर तेज प्रताप यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना सरकारी आवास खाली करना चाहिए।
तेज प्रताप यादव ने कहा, "पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सरकारी आवास खाली कराया जाए। जब वे खाली करेंगे, तब राबड़ी देवी भी खाली कर देंगी।"
कानून के अनुसार हो कार्रवाई: जमा खान
वहीं बिहार सरकार के मंत्री एमडी जमा खान ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि पूरे मामले का समाधान कानून और संविधान के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मुझे इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन जो भी हो, कानून और संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए।"
"24 घंटे में सामान बांधकर घर लौट जाऊंगा"
सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में कहा कि उन्हें सरकारी आवास से कोई मोह नहीं है। उन्होंने कहा, "जिस दिन मेरी पार्टी और नेतृत्व तय कर देगा कि मेरा कार्यकाल समाप्त हो गया है, मैं 24 घंटे के भीतर अपना सामान बांधकर अपने निजी घर लौट जाऊंगा। मैं यहां जनसेवा के लिए आया हूं, निजी लाभ के लिए नहीं।"
मुख्यमंत्री ने कुछ राजनीतिक परिवारों पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे जनता की समस्याओं से ज्यादा अपने परिवार के लिए अलग-अलग सरकारी आवास सुनिश्चित करने में रुचि रखते हैं।
प्रमुख बिंदु
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मुद्दा |
विवरण |
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विवादित आवास |
10 सर्कुलर रोड |
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वर्तमान निवासी |
राबड़ी देवी और लालू परिवार |
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सरकार का आदेश |
15 दिन के भीतर बंगला खाली करने का नोटिस |
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नया आवंटन |
नंद किशोर राम को बंगला आवंटित |
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वैकल्पिक आवास |
39 हार्डिंग रोड |
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राबड़ी देवी का रुख |
बंगला खाली करने से इनकार |
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सम्राट चौधरी का बयान |
सरकारी आवास जनता की संपत्ति, पुश्तैनी संपत्ति नहीं |
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तेज प्रताप यादव की मांग |
पहले नीतीश कुमार आवास खाली करें |
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार की राजनीति आगामी चुनावी और राजनीतिक गतिविधियों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में सरकारी आवास का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक मामला न रहकर एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
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