भारत के रक्षा क्षेत्र को बड़ी सफलता: ब्रह्मोस मिसाइल में रूस की रुचि, अगले साल ब्रह्मोस-एनजी ट्रायल की उम्मीद

भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। रूस ने संकेत दिया है कि वह ब्रह्मोस नेक्स्ट जनरेशन (BrahMos-NG) मिसाइल को अपनी सशस्त्र सेनाओं में शामिल कर सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि दावा किया जाता है कि दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस को इंटरसेप्ट नहीं कर सकता—और इसका प्रदर्शन हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान..

भारत के रक्षा क्षेत्र को बड़ी सफलता: ब्रह्मोस मिसाइल में रूस की रुचि, अगले साल ब्रह्मोस-एनजी ट्रायल की उम्मीद
11-09-2025 - 10:15 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

मॉस्को। भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। रूस ने संकेत दिया है कि वह ब्रह्मोस नेक्स्ट जनरेशन (BrahMos-NG) मिसाइल को अपनी सशस्त्र सेनाओं में शामिल कर सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि दावा किया जाता है कि दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस को इंटरसेप्ट नहीं कर सकता—और इसका प्रदर्शन हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी हुआ। इसके बाद रूसी सेना ने ब्रह्मोस-एनजी को अपने शस्त्रागार में शामिल करने पर विचार शुरू कर दिया है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस, जो भारत और रूस का संयुक्त उद्यम है, उत्पादन लाइन को तेजी से बढ़ा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों ने मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है। इसी से उत्साहित होकर कंपनी अब बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी कर रही है, ताकि लागत घटे और खरीदारों की संख्या और बढ़े।

प्रमुख तथ्य..

  • ब्रह्मोस मिसाइल का उत्पादन वर्तमान में बेहद महंगा है।
  • पिछले 25 वर्षों में केवल लगभग 1,000 ब्रह्मोस मिसाइलें बनी हैं—यानी औसतन सालाना 25 यूनिट।
  • भारत और रूस ने बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।
  • रिपोर्टों के अनुसार, रूस सरकार भारत में पड़े भारतीय रुपये का इस्तेमाल ब्रह्मोस उत्पादन के विस्तार में कर सकती है।
  • ब्रह्मोस-एनजी भारत की विकसित होती रणनीति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है।
  • यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की और काफी तेज होगी।
  • पूर्व जगुआर पायलट विजयेंद्र के. ठाकुर के अनुसार, ब्रह्मोस-एनजी की ऑटोनॉमस फ्लाइट टेस्टिंग अगले साल 2026 में शुरू हो सकती है।
  • मौजूदा ब्रह्मोस का वजन करीब 3,000 किलोग्राम है, जबकि एयरफोर्स वेरिएंट लगभग 2,500 किलोग्राम का है।
  • तुलना में, ब्रह्मोस-एनजी का वजन करीब 1,250 किलोग्राम होगा, जिससे इसे MiG-29 और LCA तेजस Mk-1A जैसे हल्के लड़ाकू विमानों से दागा जा सकेगा।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के डिप्टी सीईओ चिलुकोटी चंद्रशेखर ने रूस की राज्य समाचार एजेंसी TASS को बताया—संभव है कि रूस भी अपनी सशस्त्र सेनाओं के लिए इस मिसाइल को हासिल करे। भारतीय और रूसी पक्ष मिलकर मिसाइलों की लागत कम करने पर काम कर रहे हैं ताकि अधिकतम निर्यात ऑर्डर पूरे किए जा सकें। निर्यात के साथ-साथ अपनी सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें उत्पादन सुविधाओं का विस्तार करना होगा। हम अपने रूसी साझेदारों के साथ मिलकर इस क्षमता को बढ़ा रहे हैं।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।