‘पूरी तरह भ्रांतिपूर्ण’: मद्रास हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की ‘वोट चोरी’ टिप्पणी पर दायर याचिका खारिज की; याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का जुर्माना
मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से विपक्ष के नेता राहुल गांधी की “वोट चोरी” संबंधी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण मांगने वाली जनहित याचिका (PIL) को मंगलवार को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को “पूरी तरह भ्रांतिपूर्ण” करार..
नयी दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से विपक्ष के नेता राहुल गांधी की “वोट चोरी” संबंधी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण मांगने वाली जनहित याचिका (PIL) को मंगलवार को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को “पूरी तरह भ्रांतिपूर्ण” करार दिया।
बेंच ने अपने आदेश में कहा, “याचिका अस्पष्ट है, ठोस तथ्यों से रहित है, इसमें कोई सारगर्भित सबूत नहीं है और यह केवल राजनीतिक दावों और प्रतिदावों पर आधारित है। ऐसे आधार पर चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया, जिसे तमिलनाडु राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को जमा करना होगा। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका की खारिज़ी को आरोपों पर उसकी राय न माना जाए और चुनाव आयोग इस विषय पर अपनी स्वतंत्र कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग
7 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि 2024 लोकसभा चुनाव चुनाव आयोग द्वारा “कोरियोग्राफ” किए गए थे ताकि बीजेपी को फायदा हो सके। उन्होंने तंज कसा कि बीजेपी ही एकमात्र पार्टी है जो “एंटी-इंकम्बेंसी से प्रतिरक्षित” है।
कांग्रेस की “रिसर्च” का हवाला देते हुए उन्होंने कर्नाटक की महादेवपुरा विधानसभा सीट में 1,00,250 वोटों की “वोट चोरी” का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने इस दावे को “निराधार” बताते हुए गांधी से शपथपत्र दाखिल करने या अपने “absurd remarks” (बेतुकी टिप्पणी) के लिए माफी मांगने को कहा।
रायबरेली सांसद गांधी ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के ही डेटा का हवाला दिया है और सांसद होने के नाते पहले ही संविधान की शपथ ले चुके हैं।
1 सितंबर को बिहार की राजधानी पटना में एक रैली के दौरान उन्होंने नए खुलासों का संकेत देते हुए कहा कि “एटम बम” के बाद अब वे एक “हाइड्रोजन बम” गिराने वाले हैं।
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