नेपाल सेना प्रमुख की पहल, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बनीं अंतरिम प्रमुख

काठमांडू की सड़कों पर दो दिन की हिंसक झड़पों के बाद व्यवस्था बहाल करने उतरी सेना की मौजूदगी के बीच नेपाल सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल बुधवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश की अंतरिम कार्यकारी प्रमुख बनने के लिए मनाने में..

नेपाल सेना प्रमुख की पहल, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बनीं अंतरिम प्रमुख
11-09-2025 - 10:02 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

काठमांडू। काठमांडू की सड़कों पर दो दिन की हिंसक झड़पों के बाद व्यवस्था बहाल करने उतरी सेना की मौजूदगी के बीच नेपाल सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल बुधवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश की अंतरिम कार्यकारी प्रमुख बनने के लिए मनाने में सफल रहे। यह घटनाक्रम के पी शर्मा ओली सरकार के पतन के बाद सामने आया।

सूत्रों के मुताबिक, जनरल सिग्देल ने “जेन ज़ी” आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समूहों और अन्य व्यक्तियों से कई दौर की बातचीत की, कुछ से सामूहिक और कुछ से अलग-अलग। इसके बाद वे बुधवार तड़के लगभग 2 बजे धापासी स्थित कार्की के घर पहुंचे और कहा कि उन्हें ही अंतरिम सरकार का नेतृत्व करना चाहिए।

कार्की शुरू में तैयार नहीं थीं, लेकिन 15 घंटे बाद तब सहमत हुईं जब जेन ज़ी समूहों ने औपचारिक आग्रह किया। काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह, जिनका नाम भी अंतरिम प्रमुख की दौड़ में लिया जा रहा था, ने भी कार्की के नाम पर सहमति जताई।

जनरल सिग्देल ने जिन दौर की बैठकों का नेतृत्व किया, उनमें सबसे बड़ी प्राथमिकता जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना, साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय करना और गुरुवार या शुक्रवार तक अंतरिम सरकार का गठन करना बताया गया।

नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश कार्की जून 2017 में सेवानिवृत्त हुई थीं, लेकिन हालात अच्छे नहीं थे। नेपाली कांग्रेस ने संसद सचिवालय में उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव दाखिल किया था, हालांकि उनके रिटायर होते ही उसे आगे नहीं बढ़ाया गया।

इस बार कार्की के साथ नेपाल सेना भी खड़ी रहेगी, जो उनके साथ मिलकर निश्चित समयसीमा में नया संविधान लाने का काम करेगी। मौजूदा संविधान, जिसे बने दस साल हुए हैं, अब अप्रभावी माना जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि इसी साल मार्च में जनरल सिग्देल ने ओली को चेतावनी दी थी कि वे पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को गिरफ्तार न करें और न ही नजरबंद करें, क्योंकि उस समय उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी।

अब जब देश दंगों और आगजनी की लपटों में है और ओली सरकार जा चुकी है, नेपाल सेना पहली बार सीधे आगे आई है। राजनीतिक दलों और जेन ज़ी समूहों के बीच बनी मौन सहमति के आधार पर सेना का मकसद दोहरा है—पहला, हिंसा, लूटपाट और अराजकता को रोकना और दूसरा, विभिन्न राजनीतिक शक्तियों को संवाद की मेज़ पर लाकर व्यवस्था पर सहमति बनाना।

2006 में नेपाल ने जब राजशाही से हटकर धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनने की यात्रा शुरू की, तभी रॉयल नेपाल आर्मी का नाम बदलकर नेपाल आर्मी रखा गया। इसके बाद सेना ने खुद को राजनीतिक मामलों से दूर रखा और नयी राजनीतिक व्यवस्था में सहयोग दिया। 2008 में जब राजशाही खत्म हुई और राजा को सेना के सर्वोच्च कमांडर के पद से हटाया गया, तब भी सेना ने राजनीतिक हस्तक्षेप से खुद को बचाए रखा।

मई 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ ने सेना प्रमुख रूकमंगुद कटवाल को बर्खास्त कर एक कनिष्ठ जनरल को नियुक्त कर दिया। लेकिन कटवाल ने इसका विरोध किया और तत्कालीन राष्ट्रपति राम बरन यादव ने उस नियुक्ति पर वीटो लगा दिया। अंततः इस विवाद के चलते प्रचंड को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।