सीडीएस चौहान ने कहा, ‘इजाजत नहीं मिली, वायुसेना का इस्तेमाल होता तो 1962 में चीनी हमले को रोका जा सकता था..!’

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में यदि भारतीय वायुसेना (आईएएफ) का इस्तेमाल किया गया होता, तो चीनी आक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता..

सीडीएस चौहान ने कहा, ‘इजाजत नहीं मिली, वायुसेना का इस्तेमाल होता तो 1962 में चीनी हमले को रोका जा सकता था..!’
26-09-2025 - 10:58 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में यदि भारतीय वायुसेना (आईएएफ) का इस्तेमाल किया गया होता, तो चीनी आक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता था।

सीडीएस ने यह टिप्पणी लेफ्टिनेंट जनरल एसपीपी थोराट की संशोधित आत्मकथा ‘रेवेली टू रिट्रीट’ के पुणे में विमोचन के दौरान एक वीडियो संदेश में दी।

एयरफोर्स के इस्तेमाल पर रोक

जनरल चौहान ने बताया कि उस समय वायुसेना का उपयोग “उग्र” माना जाता था और तत्कालीन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि एयरफोर्स तैनाती से न केवल चीनी हमला धीमा पड़ता, बल्कि भारतीय सेना को तैयारी का पर्याप्त समय भी मिलता। वायुसेना की क्षमता, छोटे टर्नअराउंड समय और भूगोल के अनुकूल होने के कारण वह चीनी सेना पर भारी पड़ सकती थी।

फॉरवर्ड पॉलिसी में रणनीतिक गलती

सीडीएस ने कहा कि 1962 में अपनाई गई फॉरवर्ड पॉलिसी को लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (एनईएफए, वर्तमान अरुणाचल प्रदेश) में समान रूप से लागू करना रणनीतिक भूल थी। लद्दाख में चीन पहले ही भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर चुका था।

एनईएफए में भारत का दावा मजबूत था।

दोनों क्षेत्रों के लिए एक जैसी नीति अपनाना सही नहीं था। जनरल चौहान ने कहा कि तब की भू-राजनीति और सुरक्षा स्थिति अब पूरी तरह बदल चुकी है, इसलिए उस समय के फैसलों का मूल्यांकन आज के संदर्भ में करना मुश्किल है।

ऑपरेशन सिंदूर और वर्तमान रणनीति

जनरल चौहान ने हालिया ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए बताया कि अब वायुसेना का इस्तेमाल सामान्य रणनीति का हिस्सा बन गया है। मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए वायु शक्ति का प्रभावी उपयोग किया। उन्होंने कहा कि उस समय वायुसेना का इस्तेमाल “उग्र” माना जाता था, लेकिन अब इसे रणनीतिक तरीके से लागू करना सामान्य हो गया है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।