अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: चीन ने पाकिस्तान को 36 जे-10 लड़ाकू विमान सौंपे, भारत के राफेल विमानों के बराबर संख्या
अमेरिका के रक्षा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) की बीजिंग की सैन्य गतिविधियों पर ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पिछले पाँच वर्षों में दो अलग-अलग ऑर्डरों के तहत पाकिस्तान को कुल 36 जे-10 लड़ाकू विमान सौंपे हैं। यह संख्या भारत द्वारा खरीदे गए 36 राफेल लड़ाकू विमानों के बराबर..
नयी दिल्ली। अमेरिका के रक्षा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) की बीजिंग की सैन्य गतिविधियों पर ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पिछले पाँच वर्षों में दो अलग-अलग ऑर्डरों के तहत पाकिस्तान को कुल 36 जे-10 लड़ाकू विमान सौंपे हैं। यह संख्या भारत द्वारा खरीदे गए 36 राफेल लड़ाकू विमानों के बराबर है।
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को 2020 से जे-10 मिलने शुरू हुए, उसी साल भारत को भी अपने पहले चार राफेल विमान प्राप्त हुए थे।
‘एनुअल रिपोर्ट टू कांग्रेस: मिलिट्री एंड सिक्योरिटी डेवलपमेंट्स इनवॉल्विंग द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना फॉर 2025’ में कहा गया है, “मई 2025 तक, पाकिस्तान को 20 इकाइयाँ (जे-10सी के रूप में) दी जा चुकी हैं—ये जे-10 के एकमात्र निर्यात हैं—और 2020 से अब तक दो ऑर्डरों में कुल 36 की आपूर्ति की गई है।”
जे-10 और पीएल-15 मिसाइलें
जे-10 विमानों का प्रमुख एयर-टू-एयर हथियार पीएल-15 मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया था।
चीन के पास इस मिसाइल के दो संस्करण हैं—
- निर्यात संस्करण: लगभग 150 किमी रेंज
- स्वदेशी (चीन के लिए): लगभग 250 किमी रेंज
बताया जाता है कि ऑपरेशन सिंदूर—जो कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किया गया—से कुछ दिन पहले ही चीन ने पाकिस्तान को लंबी दूरी वाले पीएल-15 मिसाइलें सौंपी थीं।
द प्रिंट पहले यह भी रिपोर्ट कर चुका है कि पाकिस्तान ने एयर-टू-एयर कॉम्बैट में नाटो-शैली की रणनीति अपनाई।
‘लॉन्च-एंड-लीव’ रणनीति
यह रणनीति ‘लॉन्च-एंड-लीव’ के नाम से जानी जाती है, जिसमें दो विमान मिलकर एक मिसाइल को नियंत्रित करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, एक विमान मिसाइल दागने के बाद दुश्मन की जवाबी फायर से बचने के लिए रास्ता बदल लेता है। इसके बाद दूसरा विमान, जो अधिक उन्नत रडार या टार्गेटिंग सिस्टम से लैस होता है, मिसाइल का नियंत्रण संभाल लेता है।
दूसरा विमान मिसाइल को लक्ष्य तक गाइड करता है, जिससे भारी वायु-रक्षा वाले माहौल या लंबी दूरी से दुश्मन को निशाना बनाना संभव होता है।
मिसाइल लक्ष्य के एक निश्चित दायरे में आने पर ही सक्रिय होती है और उसकी गति के आधार पर लक्ष्य के पास 8 से 12 सेकंड का समय होता है, ताकि वह रास्ता बदल सके।
सूत्रों ने बताया कि आधुनिक लड़ाकू विमानों—जिनमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम होते हैं—के खिलाफ सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए सेनाएँ अक्सर एक ही लक्ष्य पर कई पीएल-15 मिसाइलें दागती हैं।
माना जाता है कि पाकिस्तान द्वारा संचालित चीनी जे-10 और स्वीडन का साब 2000 एराई (AEW&C) विमान ऐसी ‘लॉन्च-एंड-लीव’ रणनीतियों को अंजाम देने में सक्षम हैं।
इज़राइल कनेक्शन
माना जाता है कि जे-10सी की उत्पत्ति इज़राइल के बहु-अरब डॉलर के ‘लावी’ फाइटर जेट प्रोग्राम से जुड़ी है, जिसे अगस्त 1987 में रोक दिया गया था।
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