सोनिया गांधी पर मतदाता सूची में धांधली का आरोप, दिल्ली कोर्ट में आपराधिक शिकायत दाखिल
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित धांधली के आरोप में दिल्ली की एक अदालत में आपराधिक शिकायत दाखिल की गई है। आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता ग्रहण करने से पहले ही मतदाता के रूप में नाम दर्ज करा लिया..
नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित धांधली के आरोप में दिल्ली की एक अदालत में आपराधिक शिकायत दाखिल की गई है। आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता ग्रहण करने से पहले ही मतदाता के रूप में नाम दर्ज करा लिया था।
कोर्ट में सुनवाई
यह याचिका अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई, जिसकी सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट के एसीएमएम (अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी) वैभव चौरसिया ने की। अदालत ने दर्ज किया कि शिकायतकर्ता की ओर से बहस पूरी हो चुकी है और अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की गई है।
“मामला राजनीतिक नहीं, कानूनी है”
शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल सोनी और पवन नारंग पेश हुए। नारंग ने दलील दी कि इस विवाद को राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि कानूनी आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा,“यह मुद्दा राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी है। यह संज्ञेय अपराध है और इसमें पुलिस जांच जरूरी है।”
आरोप क्या हैं?
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी, जो उस समय इटली की नागरिक थीं, ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता ग्रहण की थी। लेकिन उनके नाम को 1981–82 में ही नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज कर लिया गया था।
नारंग ने अदालत को बताया कि बाद में 1982 में सोनिया गांधी और उनके दिवंगत देवर संजय गांधी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उनके मुताबिक, यह हटाया जाना इस बात का संकेत है कि पहले उनका नाम अवैध तरीके से दर्ज किया गया था, क्योंकि केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं।
फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल का शक
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फर्जी या जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। नारंग ने कहा,“एक सार्वजनिक प्राधिकरण को गुमराह किया गया है और धोखाधड़ी की आशंका है।” उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
FIR और जांच की मांग
याचिका में एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच की मांग की गई है। साथ ही, 1985 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले (राकेश सिंह बनाम सोनिया गांधी) का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि सोनिया गांधी 30 अप्रैल 1983 को ही भारतीय नागरिक बनी थीं।
शिकायतकर्ता ने अदालत से मांग की है कि चुनाव आयोग से रिकॉर्ड तलब किए जाएं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय नागरिकता लेने से पहले सोनिया गांधी का मतदाता पंजीकरण कैसे हुआ।
What's Your Reaction?