जीएसटी 2.0 पर सियासी संग्राम: कांग्रेस ने राहुल गांधी को दिया श्रेय, बीजेपी बोली– ‘अर्थव्यवस्था की समझ नहीं’
जीएसटी दरों के सरलीकरण (GST Rationalisation) को लेकर बुधवार को राजनीतिक घमासान छिड़ गया। कांग्रेस ने इस फैसले का श्रेय राहुल गांधी को देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जीएसटी काउंसिल को “सिर्फ औपचारिकता” बना देने का आरोप लगाया। वहीं, बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी को अर्थव्यवस्था की समझ ही..
नयी दिल्ली। जीएसटी दरों के सरलीकरण (GST Rationalisation) को लेकर बुधवार को राजनीतिक घमासान छिड़ गया। कांग्रेस ने इस फैसले का श्रेय राहुल गांधी को देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जीएसटी काउंसिल को “सिर्फ औपचारिकता” बना देने का आरोप लगाया। वहीं, बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी को अर्थव्यवस्था की समझ ही नहीं है।
कांग्रेस का दावा – ‘राहुल गांधी की सोच है जीएसटी 2.0’
कांग्रेस संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी लंबे समय से जीएसटी 2.0 की मांग करती आ रही थी, जिसमें राहुल गांधी ने दो स्लैब (5% और 18%) का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो निर्णय काउंसिल में घोषित किया, उसका ऐलान प्रधानमंत्री पहले ही स्वतंत्रता दिवस भाषण में कर चुके थे। रमेश ने पूछा,“क्या जीएसटी काउंसिल अब सिर्फ औपचारिकता रह गई है?”
खड़गे का हमला – ‘वन नेशन, नाइन टैक्स’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जीएसटी सरलीकरण का स्वागत किया, लेकिन राज्यों को मुआवज़ा देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा, “आठ साल की नींद के बाद मोदी सरकार जागी है। राज्यों को 2024–25 को आधार वर्ष मानकर अगले पांच साल तक मुआवजा मिलना चाहिए, क्योंकि कम दरों से राजस्व घटेगा।”
खड़गे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस-UPA ने 2005 में जीएसटी की घोषणा और 2011 में विधेयक पेश किया, जिसे बीजेपी ने उस समय विरोध किया था। उन्होंने कहा कि जब मोदी मुख्यमंत्री थे तो जीएसटी का विरोध करते थे, लेकिन अब उसी को रिकॉर्ड कलेक्शन बताकर जश्न मना रहे हैं।
उन्होंने जीएसटी को “गब्बर सिंह टैक्स” कहते हुए आरोप लगाया कि इसमें किसानों पर भी कर लगाया गया और 36 कृषि उत्पादों को इसके दायरे में लाया गया। यहां तक कि दूध, दही, अनाज, बच्चों की पेंसिल और किताबें, ऑक्सीजन, बीमा और अस्पताल खर्चों पर भी टैक्स लगाया गया।
आँकड़ों से हमला
कांग्रेस का कहना है कि कुल जीएसटी वसूली का 64% गरीब और मध्यमवर्ग से आता है, जबकि अरबपतियों का योगदान सिर्फ 3% है। इसके साथ ही कॉरपोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 22% कर दिया गया।
खड़गे ने आंकड़े भी रखे—
- पिछले 5 वर्षों में आयकर संग्रह में 240% की वृद्धि।
- जीएसटी संग्रह में 177% की वृद्धि।
बीजेपी का पलटवार – ‘नकारात्मक सोच’
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य है कि राहुल गांधी को यह समझ नहीं है कि 7.8% की दर से बढ़ रही दुनिया की सबसे तेज़ अर्थव्यवस्था खुशी की बात है। वे भारत को मृत अर्थव्यवस्था बताते हैं। यह सोच नकारात्मक है और मैं इसकी निंदा करता हूं।”
चिदंबरम की चुटकी – ‘8 साल देर से फैसला’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जीएसटी दरों में कटौती का स्वागत किया, लेकिन इसे देर से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा,“यह कदम सही है, लेकिन आठ साल देर से आया है।”
चुनावी रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस फैसले को राहुल गांधी की जीत के रूप में पेश करेगी और इसे आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनाएगी।
नया ढांचा – 5% और 18%
जीएसटी काउंसिल ने पहले के चार-स्तरीय ढांचे (5%, 12%, 18% और 28%) को खत्म करके अब सिर्फ दो दरें (5% और 18%) लागू करने का निर्णय लिया है। नया ढांचा 22 सितंबर से लागू होगा।
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