खांसी की दवा से बच्चों की मौत: ‘स्रीशन फार्मा’ के मालिक एस. रंगनाथन गिरफ्तार, मौतों का आंकड़ा 20 पहुंचा
मध्यप्रदेश पुलिस ने छिंदवाड़ा में जहरीली खांसी की दवा ‘कोल्डरिफ’ (Coldrif) से हुई बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चेन्नई स्थित स्रीशन फार्मा (Sresan Pharma) के मालिक एस. रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही कंपनी है जिसने कथित तौर पर यह जहरीली दवा बनाई..
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस ने छिंदवाड़ा में जहरीली खांसी की दवा ‘कोल्डरिफ’ (Coldrif) से हुई बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चेन्नई स्थित स्रीशन फार्मा (Sresan Pharma) के मालिक एस. रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही कंपनी है जिसने कथित तौर पर यह जहरीली दवा बनाई थी।
छिंदवाड़ा के एसपी अजय पांडे ने बताया कि रंगनाथन को बीती रात चेन्नई से गिरफ्तार किया गया। अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड लेकर मध्यप्रदेश लाया जाएगा। पुलिस टीम ने इसके लिए चेन्नई और कांचीपुरम में सर्च ऑपरेशन चलाया था।
20 बच्चों की मौत, 5 की हालत नाजुक
पिछले 24 घंटों में तीन और बच्चों की मौत से मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।
- धनी देहरिया (1.5 वर्ष) – तामिया
- ज्यांशु यादववंशी (2 वर्ष) – जुन्नारदेव
- वेदांश पवार (2.5 वर्ष) – रिधोरा
तीनों बच्चों ने नागपुर अस्पताल में दम तोड़ा। अब तक 17 मौतें छिंदवाड़ा, 1 पांढुर्णा और 2 बेतुल से दर्ज की गई हैं। 5 अन्य बच्चे अभी भी गंभीर स्थिति में हैं।
जहरीले रसायनों से बच्चों के गुर्दे फेल हुए
प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि ‘कोल्डरिफ’ सिरप में जहरीले रसायन मौजूद थे, जिन्होंने बच्चों के किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।
सिरप पीने के कुछ ही घंटों में गुर्दे फेल होने के लक्षण दिखाई दिए, जिससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई।
इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने पांच मेडिकल दुकानों को सील कर दिया है और दवा के सैंपल को लैब में जांच के लिए भेजा गया है। गांव-गांव जाकर लोगों को खांसी की कोई भी दवा बच्चों को न देने की चेतावनी दी जा रही है।
डॉक्टरों पर कार्रवाई के विरोध में IMA की चेतावनी
इस मामले में कुछ निजी डॉक्टरों जिनमें डॉ. प्रवीन सोनी भी शामिल हैं, के विरुद्ध जांच शुरू की गई है।
हालांकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कहा कि डॉक्टरों को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।
IMA ने चेतावनी दी कि अगर डॉक्टरों को परेशान किया गया तो हड़ताल पर जाने पर विचार किया जाएगा।
इस बीच उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों से संयम बनाए रखने की अपील की और कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार चार साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप न दी जाए।
कांग्रेस ने मुआवजे की मांग की, सरकार पर लापरवाही का आरोप
इस हादसे ने राज्य में राजनीतिक हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने हर पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की और आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लापरवाही व दवा कंपनियों की निगरानी में कमी के कारण यह त्रासदी हुई।
वहीं भाजपा सरकार ने कहा कि जांच पारदर्शी तरीके से चल रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी..चाहे वह निर्माता हो या दवा बेचने वाली दुकान।
राज्यभर में अलर्ट, बच्चों की दवाओं पर सख्त निगरानी
मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों के लिए बनाई जाने वाली दवाओं की व्यापक जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि माता-पिता किसी भी दवा के प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लें और सिर्फ मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज कराएं।
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान भी शुरू किए गए हैं, जिनमें स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर समझा रही हैं कि
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