RBI ने रुख बदला, अब गिर सकते हैं जमा दरें.. डिपॉजिट पर कम ब्याज की तैयारी में बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘अकोमोडेटिव’ यानी उदार बना लिया है और रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। इसका सीधा असर जल्द ही बैंकों की जमा दरों (deposit rates) पर पड़ सकता है, जो अब घट सकती हैं..

RBI ने रुख बदला, अब गिर सकते हैं जमा दरें.. डिपॉजिट पर कम ब्याज की तैयारी में बैंक
10-04-2025 - 09:39 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल’ से बदलकर ‘अकोमोडेटिव’ यानी उदार बना लिया है और रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। इसका सीधा असर जल्द ही बैंकों की जमा दरों (deposit rates) पर पड़ सकता है, जो अब घट सकती हैं।

 क्या कहा RBI गवर्नर ने?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा:

हम सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी देंगे ताकि पॉलिसी रेट का ट्रांसमिशन तेजी से हो सके।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि RBI का लक्ष्य नेट डिपॉजिट का लगभग 1% लिक्विडिटी सरप्लस बनाए रखना है।

 

 क्यों घटेंगी जमा दरें?

  • बैंकों के लिए फंड जुटाना आसान होगा, क्योंकि अब बाजार में नकदी (liquidity) की कमी नहीं है।
  • फरवरी में RBI ने रेपो रेट 25 bps घटाया था, लेकिन लिक्विडिटी की तंगी के चलते बैंकों ने लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया
  • अब जब ₹7 लाख करोड़ की नकदी RBI ने तीन महीने में बाजार में डाली है, और 7 अप्रैल तक ₹1.5 लाख करोड़ का सरप्लस हो चुका है, तो बैंकों के लिए जमा दरों में कटौती करना संभव हो गया है।

बैंक और अर्थशास्त्रियों की राय

  • सरकारी बैंक के एक कार्यकारी निदेशक ने कहा, “अब हम अप्रैल से डिपॉजिट रेट में गिरावट देख सकते हैं।”
  • एचडीएफसी बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि 50 bps की रेट कट फरवरी से अब तक मनी मार्केट और डिपॉजिट रेट्स में दिखेगी, क्योंकि लिक्विडिटी अब अनुकूल है।”

अन्य बातें जो असर डालेंगी

फैक्टर

असर

RBI का डिविडेंड भुगतान (₹2 लाख करोड़+)

लिक्विडिटी और बढ़ेगी

कर संग्रह और सरकारी खर्च

नकदी का प्रवाह सुधरेगा

करेंसी सर्कुलेशन में गिरावट

बैंकिंग सिस्टम में कैश रहेगा

 

ग्राहकों के लिए क्या मतलब है?

  • FD और RD पर मिलने वाला ब्याज घट सकता है
  • लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर आप लोन लेना चाहते हैं (होम, पर्सनल, ऑटो), तो ब्याज दरें सस्ती हो सकती हैं।

खासकर क्योंकि अब 60% से अधिक लोन EBLR (External Benchmark Lending Rate) से जुड़े हैं, तो रेपो रेट घटने का असर सीधे लोन पर दिखेगा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।