गिरफ्तारी के आधार बताना अनिवार्य, नहीं बताने पर गिरफ्तारी अमान्य: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए जाते, तो यह संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है और ऐसी गिरफ्तारी अमान्य मानी जाएगी..

गिरफ्तारी के आधार बताना अनिवार्य, नहीं बताने पर गिरफ्तारी अमान्य: केरल हाईकोर्ट
11-05-2025 - 09:53 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

तिरुवनंतपुरम। केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए जाते, तो यह संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है और ऐसी गिरफ्तारी अमान्य मानी जाएगी।

न्यायमूर्ति कौसर एदप्पगाथ ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों — विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य व अन्य (2025), पंकज बंसल बनाम भारत सरकार व अन्य (2023) और प्रबीर पुरकायस्थ बनाम राज्य (2024)का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद कारणों की जानकारी न देना मौलिक अधिकार का हनन है।

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए हैं, तो उसे "एक सेकंड के लिए भी हिरासत में नहीं रखा जा सकता"।

यह टिप्पणी दो अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई — एक मलप्पुरम में NDPS (नारकोटिक्स) मामले के आरोपी के पिता द्वारा दायर की गई थी, और दूसरी पथानामथिट्टा जिले के कोइपुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी की मां द्वारा दायर की गई थी।

NDPS मामले में आरोपी को 2 अक्टूबर 2024, और धोखाधड़ी मामले में आरोपी को 6 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपियों को गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए, जिससे अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन हुआ।

हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि बिना वारंट के किसी भी गिरफ्तारी की स्थिति में पुलिस अधिकारी को तुरंत गिरफ्तारी के कारण या अपराध का पूरा विवरण देना आवश्यक है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के अनुसार गिरफ्तारी की परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से लिखित रूप में दर्ज और समझाया जाना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट भी इस स्थिति का समर्थन करता है।

हालांकि अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आरोपियों को गिरफ्तारी के कारण बता दिए गए थे, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया गया। इसलिए, हाईकोर्ट ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वे दोनों आरोपियों को रिहा करें।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश जांच अधिकारियों को दोबारा गिरफ्तारी करने से नहीं रोकता, बशर्ते कि अगली कोई भी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के पूर्ण पालन के साथ की जाए।

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