केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान रोके जाने से हिमाचल प्रदेश पर वित्तीय संकट: मुख्यमंत्री
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में दोहराया कि राज्य सरकार प्रदेश में संचालित सभी जलविद्युत परियोजनाओं पर राजस्व शुल्क लगाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार एक विस्तृत रूपरेखा तैयार..
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में दोहराया कि राज्य सरकार प्रदेश में संचालित सभी जलविद्युत परियोजनाओं पर राजस्व शुल्क लगाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार एक विस्तृत रूपरेखा तैयार कर रही है।
केंद्र ने राजस्व घाटा अनुदान रोका
केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant–RDG) बंद किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में 8 तारीख को केंद्र सरकार ने RDG रोक दिया है। इस गंभीर घटनाक्रम को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई है। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल (CLP) की भी बैठक होगी और सरकार इस मुद्दे पर भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित करने पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश को लगभग 48,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला। यदि 2026 से 2031 तक अगले पांच वर्षों के लिए यह सहायता अचानक बंद कर दी जाती है, तो इसका राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इस चुनौती से निपटने के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होना होगा।
पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता की अपील
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, “पर्वतीय राज्यों का गठन कभी भी राजस्व अधिशेष के आधार पर नहीं हुआ। हमें अनुच्छेद 275(1) के तहत जो राजस्व घाटा अनुदान मिलता रहा है, वह हमारा संवैधानिक अधिकार है। वर्ष 1952 से हिमाचल प्रदेश को लगातार RDG मिलता रहा है और 73 वर्षों में पहली बार हम इस तरह की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विषय को पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर, हिमाचल प्रदेश के व्यापक हित में देखा जाना चाहिए।
“यह सरकारों की लड़ाई नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के लोगों की लड़ाई है। मैं भाजपा विधायकों से भी इसमें भाग लेने की अपील करता हूं। 8 तारीख को हम उन्हें प्रस्तुति देने के लिए तैयार हैं और यह भी जानना चाहते हैं कि इस स्थिति से निपटने और नीतिगत बदलावों के जरिए ‘आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश’ की दिशा में कैसे आगे बढ़ा जा सकता है,” उन्होंने कहा।
बढ़ता वित्तीय दबाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से ही हिमाचल प्रदेश को नुकसान उठाना पड़ा है। जीएसटी मुआवजा केवल पांच वर्षों के लिए दिया गया। भाजपा सरकार के दौरान लगभग 1,600 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा सेस दिया गया था, जिसे अब बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को अधिक लाभ हुआ है, क्योंकि वहां खपत अधिक है, जबकि केवल 75 लाख की आबादी वाले हिमाचल प्रदेश को नुकसान झेलना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि आयात शुल्क में कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने भी राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर डाला है।
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