हरिद्वार: हर-की-पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक वाले होर्डिंग-पोस्टर लगे, सरकार कर रही है विचार

उत्तराखंड के हरिद्वार में हर-की-पौड़ी क्षेत्र में “गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है” लिखे कई बैनर और होर्डिंग लगाए गए हैं। गंगा घाट के आसपास गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग के बीच शुक्रवार को ये साइनबोर्ड और फ्लेक्स बैनर लगाए..

हरिद्वार: हर-की-पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक वाले होर्डिंग-पोस्टर लगे, सरकार कर रही है विचार
17-01-2026 - 11:00 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में हर-की-पौड़ी क्षेत्र में “गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है” लिखे कई बैनर और होर्डिंग लगाए गए हैं। गंगा घाट के आसपास गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग के बीच शुक्रवार को ये साइनबोर्ड और फ्लेक्स बैनर लगाए गए।

ये होर्डिंग ब्रह्मकुंड हर-की-पौड़ी और उससे सटे गंगा घाटों के पवित्र क्षेत्र के प्रबंधन की सर्वोच्च संस्था गंगा सभा की ओर से लगाए गए हैं।

गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने 1916 में बनाए गए हरिद्वार नगर पालिका उपनियमों का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रावधानों के तहत हर-की-पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश, निवास और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा, आगंतुकों की बढ़ती संख्या और गैर-हिंदुओं के इस पवित्र स्थल में प्रवेश की घटनाओं को देखते हुए हम केवल इन प्रावधानों का पालन कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन में बनाए गए इस नियम को अन्य घाटों तक भी विस्तारित किया जाना चाहिए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि उत्तराखंड सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है और हरिद्वार के गहरे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, हम वहां के सभी हितधारकों से लगातार बातचीत कर रहे हैं, जिनमें गंगा सभा के सदस्य, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और पूज्य संत शामिल हैं। हमने संकेत दिया है कि हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों से जुड़े सभी मौजूदा कानूनों और नियमों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जा रही है, जिसके आधार पर सरकार आगे कदम उठाएगी।”

गंगा सभा के सचिव उज्ज्वल पंडित, जिन्होंने हर-की-पौड़ी के आसपास होर्डिंग और फ्लेक्स बोर्ड लगाने की निगरानी की, ने कहा कि गंगा घाटों की “पवित्रता बनाए रखने” के लिए ये प्रतिबंध आवश्यक हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गंगा सभा ने उत्तराखंड सरकार से यह भी आग्रह किया है कि हर-की-पौड़ी पर ड्यूटी के लिए गैर-हिंदू सरकारी अधिकारियों या पुलिसकर्मियों की तैनाती न की जाए।

इस कदम का विरोध करते हुए पूर्व हरिद्वार नगर पालिका समिति अध्यक्ष और सोनीपत से सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा, गंगा घाट और कुंभ मेला क्षेत्र रुड़की तक फैला हुआ है, जहां बड़ी संख्या में गैर-हिंदू रहते हैं। आज के बहु-धार्मिक समाज में ऐसा व्यापक प्रतिबंध कितना व्यवहारिक है? विभाजनकारी मुद्दे उठाने के बजाय आगामी अर्धकुंभ के लिए बेहतर व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।”

समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा कि इस तरह की चर्चाओं और कदमों पर रोक लगनी चाहिए क्योंकि ये नफरत फैलाने वाले हैं। उन्होंने कहा, यह देश सभी के लिए है, किसी एक समुदाय के लिए नहीं। यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है। संविधान के अनुसार, कोई भी भारतीय देश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकता है। ऐसी चर्चाओं को रोका जाना चाहिए क्योंकि ये हमारे समाज में नफरत फैला रही हैं।”

वहीं, इस कदम का बचाव करते हुए उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि धार्मिक परंपराओं के मामले में ‘सनातन भावनाओं का सम्मान’ किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, हरिद्वार के कुछ पवित्र क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर नियम कोई नया नहीं है, बल्कि दशकों से इसे परोक्ष रूप से लागू किया जाता रहा है। सभी को धार्मिक नेताओं और स्थानीय पुरोहित समुदाय द्वारा तय की गई परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए।”

भट्ट ने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, कोई भी गैर-हिंदू धार्मिक पुण्य प्राप्त करने की मंशा से हरिद्वार में गंगा स्नान करने नहीं आता। फिर मौजूदा परंपराओं का पालन करने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए?”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।