‘काल्पनिक पक्षपात’ बताकर ट्रांसफर याचिका खारिज करने वाले जस्टिस मनोज जैन अब सुनेंगे केजरीवाल मामला

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal से जुड़े सीबीआई आबकारी घोटाला मामले से Justice Swarana Kanta Sharma के अलग होने के कुछ दिनों बाद अब Justice Manoj Jain को इस मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी सौंपी..

‘काल्पनिक पक्षपात’ बताकर ट्रांसफर याचिका खारिज करने वाले जस्टिस मनोज जैन अब सुनेंगे केजरीवाल मामला
19-05-2026 - 10:12 AM

नयी दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal से जुड़े सीबीआई आबकारी घोटाला मामले से Justice Swarana Kanta Sharma के अलग होने के कुछ दिनों बाद अब Justice Manoj Jain को इस मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में पेश होने से इनकार कर विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें वहां निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। आम आदमी पार्टी प्रमुख ने आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में जस्टिस शर्मा की कथित मौजूदगी का हवाला देते हुए “उचित पक्षपात की आशंका” जताई थी।

हालांकि जस्टिस शर्मा ने औपचारिक रूप से खुद को मामले से अलग नहीं किया, लेकिन बाद में उन्होंने केजरीवाल और अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू कर दी। इसके बाद मामले को दूसरे जज को स्थानांतरित करना पड़ा।

कौन हैं जस्टिस मनोज जैन?

Justice Manoj Jain दिल्ली हाईकोर्ट में अपेक्षाकृत नये जज माने जाते हैं। उन्हें 2023 में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 2024 में उनकी नियुक्ति स्थायी कर दी गई।

उन्होंने Panjab University के लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की। वह एक करियर जज रहे हैं और दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था में कई प्रशासनिक पदों पर काम कर चुके हैं।

उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के रूप में भी कार्य किया, जो अदालत के प्रशासन और समन्वय की अहम जिम्मेदारी संभालता है। इसे न्यायपालिका द्वारा उन पर जताए गए संस्थागत भरोसे के रूप में देखा जाता है।

न्यायपालिका की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका

मार्च में दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन द्वारा जजों को सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जैन ने कहा था कि न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने टिप्पणी की थी, इस याचिका में उठाई गई शिकायतों की गंभीरता को कम करके नहीं आंका जा सकता।”

काल्पनिक पक्षपात’ पर ट्रांसफर याचिका की थी खारिज

अप्रैल में एक अन्य मामले में जस्टिस मनोज जैन ने एक याचिकाकर्ता की उस मांग को ठुकरा दिया था, जिसमें उसने अपनी सुनवाई किसी दूसरे सीबीआई कोर्ट में स्थानांतरित करने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि “काल्पनिक पक्षपात की आशंका” सुनवाई ट्रांसफर करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।

जजों के खिलाफ जांच समिति में भी रहे शामिल

जस्टिस मनोज जैन उस सतर्कता समिति का भी हिस्सा रहे हैं जिसने कुछ जजों के खिलाफ आरोपों की जांच की थी।

पिछले साल अगस्त में इसी समिति ने सत्र न्यायाधीश Sanjeev Kumar Jain को निलंबित करने की सिफारिश की थी। उन पर एक यौन उत्पीड़न पीड़िता पर समझौते का दबाव बनाने का आरोप था।

चर्चित फैसले और जमानत मामलों में रुख

2023 के एक चर्चित फैसले में जस्टिस मनोज जैन ने यह सिद्धांत स्थापित किया था कि अदालतों को मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के फैसलों को हल्के में रद्द नहीं करना चाहिए।

वह कई मामलों में जमानत देने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने एक ऐसे वकील को जमानत दी थी जिस पर धोखाधड़ी का आरोप था और जो अपने बच्चे की स्कूल फीस की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा था।

उन्होंने एक नाबालिग को भी जमानत दी थी जो एक घातक सड़क दुर्घटना में शामिल था, जिसमें उसकी कम उम्र को ध्यान में रखा गया।

हालांकि उन्होंने Maharashtra Control of Organised Crime Act के तहत आरोपित अभियुक्तों को जमानत देने से इनकार भी किया है।

एक अन्य मामले में उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था।

अब सबकी नजर केजरीवाल मामले पर

अपने पूरे न्यायिक करियर में जस्टिस मनोज जैन ने हर मामले की परिस्थितियों का अलग-अलग विश्लेषण करने पर जोर दिया है।

हालांकि अब तक उन्होंने Central Bureau of Investigation की ओर से केजरीवाल के खिलाफ चलाए जा रहे इतने संवेदनशील और राजनीतिक रूप से चर्चित मामले की सुनवाई नहीं की है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि शायद इसी कारण अदालत ने उन्हें चुना है, क्योंकि उनकी सार्वजनिक छवि किसी खास वैचारिक झुकाव से नहीं जुड़ी रही है और उनका आबकारी घोटाला मामले से पहले कोई प्रत्यक्ष संबंध भी नहीं रहा।

फिलहाल उनकी नियुक्ति से मामले की दिशा का अंदाजा लगाना मुश्किल है। आगे यह महत्वपूर्ण होगा कि जस्टिस मनोज जैन केजरीवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ सबूतों का किस तरह विश्लेषण करते हैं और निचली अदालत के पूर्व फैसलों को कितनी अहमियत देते हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।