विजय माल्या की अपील खारिज, भारतीय बैंकों की बड़ी जीत; माल्या बोले- आदेश रद्द कराऊंगा
ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भारतीय उद्योगपति विजय माल्या को बड़ा झटका देते हुए दिवालियापन आदेश और संशोधित दिवालियापन याचिका के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है..
लंदन/नयी दिल्ली। ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भारतीय उद्योगपति विजय माल्या को बड़ा झटका देते हुए दिवालियापन आदेश और संशोधित दिवालियापन याचिका के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद भारतीय बैंकों के समूह, विशेषकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नेतृत्व में, ने इसे बड़ी जीत करार दिया है।
यह मामला करीब £1 अरब (लगभग ₹10,000 करोड़) के कर्ज की वसूली से जुड़ा है, जिसे माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने 2010 में लिया था, और माल्या ने इसपर व्यक्तिगत गारंटी दी थी। 2017 में यह कर्ज ब्रिटेन की अदालत में पंजीकृत हुआ और 2021 में माल्या को ब्रिटेन में दिवालिया घोषित कर दिया गया।
माल्या की दलील और कोर्ट का जवाब
माल्या ने अपनी अपील में कहा कि जब याचिका दायर की गई, तब उन्होंने बैंकों का कर्ज चुका दिया था या उस पर जो ब्याज बकाया था, वह भारत में एक अलग अदालती कार्यवाही के तहत चुनौती दी गई है।
हालांकि, न्यायाधीश सर एंथनी मैन ने कहा कि वह माल्या की अपील को अनुमति नहीं देंगे क्योंकि ब्याज संबंधी चुनौती को अभी तक पूरी तरह से प्रस्तुत भी नहीं किया गया है और इसका कोई ठोस आधार भी नहीं है।
भारत में चल रही आपराधिक कार्यवाही और माल्या की अनुपस्थिति
जज मैन ने यह भी कहा कि भारत में चल रहे आपराधिक मुकदमे में माल्या की मौजूदगी जरूरी थी, लेकिन माल्या ने स्वेच्छा से लौटने से इनकार किया, और इसी कारण मुकदमा रुका हुआ है। माल्या के खिलाफ प्रत्यर्पण आदेश पहले ही दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कार्यान्वित नहीं हो पाया क्योंकि माल्या ने अन्य आधारों पर प्रत्यर्पण का विरोध कर रखा है।
बैंकों की अपील पर राहत
बैंकों को एक और बड़ी राहत मिली, जब कोर्ट ने संशोधित दिवालियापन याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर किए जाने के खिलाफ उनकी अपील को स्वीकार किया। कोर्ट ने पाया कि उनकी मूल याचिका वैध थी और बैंकों के पास माल्या की संपत्तियों पर कोई गारंटी नहीं थी, इसलिए उन्हें कोई छूट देने की आवश्यकता नहीं थी।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
- बैंकों के वकील निक कर्लिंग (TLT LLP) ने कहा, “यह बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है।”
- वहीं माल्या के वकील ली क्रेस्टोहल (Zaiwalla & Co) ने कहा कि बैंकों की वसूली को “शर्तों पर आधारित” कहना गलत है। उन्होंने कहा, “माल्या दिवालियापन आदेश को रद्द कराने की प्रक्रिया में पूरी ताकत से आगे बढ़ेंगे।”
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